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🔴आलेख: दिवाकर पाठक, हजारीबाग, झारखंड |
• सावधान! बहेलिया आया,बहेलिया आया।• मानव तस्करों के जाल में झारखंड
झारखंड में इन दिनों मानव तस्करी एक गंभीर समस्या के रूप में चिन्हित होता दिख रहा है,क्योंकि संपूर्ण सूबे में इसके दलाल अपनी दुष्टकारी नीति के साथ खड़ा है। वे बहुत तेजी से अपना पांव पसारने में जुटे हैं,अर्थात् कोविड संक्रमण से भी ज्यादा खतरनाक हैं इनके वायरस। तभी तो सूबे के भोले-भाले बच्चों को अपने झूठे फरेब में फंसा कर उनके स्वतंत्र जीवन को प्रतंत्र बेड़ियों में बंद कर, विश्वासों के हत्यारा के रूप में अपने काले कारनामे का किरदार निभाते नजर आते हैं। हालांकि सूबे सरकार की भूमिका इस पर बड़ी ही व्यापक है। मुख्यमंत्री जी के सार्थक प्रयास से लगातार मानव तस्करी के शिकार लड़के-लड़कियों को मुक्त कराकर उनके घरों में पुनर्वास किया जा रहा है। इस कड़ी में मानव तस्करी की शिकार रांची जिले के तीन लड़के और गुमला की एक लड़की को दिल्ली में मुक्त कराया गया है। इस संबंध में एकीकृत पुनर्वास संसाधन केंद्र नई दिल्ली की नोडल ऑफिसर नचिकेता ने बताया कि चारो बच्चे मानव तस्करी के शिकार होकर अलग-अलग समय पर दिल्ली लाए गए थे। 3 लड़कों को दिल्ली पुलिस ने रेलवे स्टेशन से रेस्क्यू कराया,वहीं गुमला जिले की एक लड़की को मानव तस्कर दिल्ली लाया था। उसे एक कोठी में घरेलू काम करने के लिए बेच दिया था,जहां इस लड़की से दिन-रात काम कराया जाता था। काम के बदले उसको पैसे भी नहीं दिए जा रहे थे। शारीरिक यातना से प्रताड़ित होकर बच्ची वहां से भाग निकली। भागने के दौरान किसी की नजर उस बच्ची पर पड़ी और उसे रेस्क्यू किया गया। कुल मिलाकर सरकारी तंत्र के लोग ऐसे बच्चों का रेस्क्यू और पुनर्वास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। पर जो सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है कि आखिर बच्चे इनके मकड़जाल में कैसे फंसते चले जा रहे हैं? जिसका उत्तर बड़ा ही संवेदनशील है और हमें इसे बड़ी ही गंभीरता से समझने की भी जरूरत है। दिल्ली से मुक्त कराए गए बच्चों को दलालों के माध्यम से लाया गया था। सूबे में ऐसे दलाल बहुत सक्रिय हैं,जो छोटी बच्चियों को बहला-फुसलाकर अच्छी जिंदगी जीने का लालच देकर उन्हें दिल्ली लाते हैं और विभिन्न घरों में उन्हें काम पर लगाने के बहाने बेच देते हैं। इससे उन्हें एक मोटी रकम प्राप्त होती है और इन बच्चियों की जिंदगी नर्क से भी बदतर बना दी जाती है।
दूसरी ओर दलालों के चंगुल में बच्चों को भेजने में उनके माता-पिता की भी अहम भूमिका होती है। कई बार ऐसा देखा गया है कि बच्चे अपने माता-पिता,अपने रिश्तेदारों की सहमति से ही दलालों के चंगुल में फंसकर मानव तस्करी के शिकार बन जाते हैं। जरा गौर करें,यह तो वही बात हुई ना कि बहेलिया आया,दाना डाला और अपने स्वार्थ के जाल में फंसा कर ले गया। अब आप बड़ी ही आसानी से समझ सकते हैं कि हमें अपने बच्चों को ऐसे शिकारियों से कैसे बचाना चाहिए? सरकारी तंत्र तो इस पर बिल्कुल सक्रिय है, इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है। मुक्त हुए बच्चों की सतत् निगरानी की भी बात की जा रही है। पर यहां जो सबसे महत्वपूर्ण ध्यान देने योग्य बात है कि केवल सरकार के प्रयास से इस संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सकता। बल्कि माता-पिता को भी अपने स्वार्थों की तिलांजलि देकर अपने बच्चों के हित में कर्तव्य परायणता के पथ का अनुसरण करना होगा। तभी ऐसे संक्रमण जन्य रोगाणु की रोकथाम हो सकेगी। ऐसा कर वे ऐसे दलालों की पहचान कर सकने में सरकार और प्रशासन तंत्र को सहयोग करने का कार्य करें। तभी ऐसी दुष्ट आत्माओं की दुष्टता उन्हें नरक के द्वार तक ले जाने का कार्य करेगी। यह अवश्य जान लें कि जो मां-बाप बच्चों की परवरिश सही तरीके से नहीं कर सकते, वे सबसे बड़े शत्रु के समान होते हैं। केवल स्वयं के स्वार्थ लिप्सा की पूर्ति के लिए बच्चों के हितों की हत्या करना,जीवन का सबसे बड़ा पाप है। ऐसे रिश्तेदारों से भी दूर रहे जो आपके बच्चे के बचपन को छीनकर,उसे तड़पने को मजबूर कर दे। अपने बच्चों को विषम परिस्थितियों से निकलने और ऐसे धूर्तलोगों से बचने के टिप्स प्रदान करें,जिससे उनका जीवन नर्क होने से बच सके। केवल बच्चों को जन्म देने से ही आपका कर्तव्य समाप्त नहीं हो जाता,बल्कि जब तक आप स्वयं बुद्धिमान बनकर अपने बच्चों को सही और गलत चीजों की पहचान करना नहीं सिखला देते, तब तक आपके कर्तव्य की काया सार्थक नहीं हो पाती। आपको अपने बच्चों के स्वाभिमान की रक्षा हर हाल में करनी चाहिए। यदि कोई आपके बच्चे के साथ ज्यादती करता है,तो उसके खिलाफ मुखर बनिए। अन्याय की अग्नि को बुझा डालिए। बच्चों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सिखाइए। उसे समझाते हुए उसके ज्ञान का विस्तार करें। अपने बच्चे बच्चियों के प्रति हमेशा सजग रहें। यह अवश्य ध्यान दें कि कोई उन्हें बहला-फुसलाकर अपने झांसे में तो नहीं ले जा रहा है। बच्चों को ऐसा बनाएं कि आप से अपनी समस्या आसानी से शेयर करें। कुल मिलाकर यह हमेशा ध्यान रखें कि ना किसी का शोषण करें,ना करने दें। हमेशा बुद्धिमता का परिचय दें। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का यह परम् कर्तव्य होता है कि हमारी सुरक्षा में कोई चूक ना हो जाए। बल्कि हमारी सुरक्षा बिल्कुल सुरक्षित हों। सब का ख्याल रखें,साथ ही स्वयं का भी ख्याल रखें। क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में काल्पनिक प्रतिबिंब ज्यादा है, जबकि वास्तविक प्रतिबिंब की पहचान के लिए अपने दिमाग की बत्ती को जलाना होगा,तभी जीवन में उजाले की कामना फलीभूत हो सकेगी। वरना! व्यर्थ के जीवन का कोई मोल नहीं। साथ ही बच्चे बच्चियों को भी अपने मां-बाप के बताए सुमार्ग पर ही अनुगमन करना चाहिए,ना की कुमार्ग पर। क्योंकि कुमार्ग हमेशा बुरे चीजों को ही जन्म देती है। इसलिए बच्चे और मां-बाप दोनों को ही सुमार्ग गामी होने की जरूरत है। तभी ऐसे मनचलों पर नकेल कसी जा सकेगी। वरना! दुष्ट आत्माओं का संक्रमण तो हर क्षेत्र में बढ़ता ही जा रहा है,जो हमारी स्वतंत्रता को रौंदकर हमें परतंत्र के लॉक डॉन में जीवन जीने को मजबूर करती रहेगी।
दूसरी ओर सरकार को भी ऐसे मनचलों पर नकेल कसने के लिए कड़े कानून की हथकड़ी पहनानी होगी,तभी अपराध की ऐसी अग्नि बार-बार प्रज्वलित नहीं हो सकेगी। वरना! दुष्टों का तो काम ही है दुष्टता करना। उससे निकलने का मार्ग तो हमें ही विकसित करनी होगी ना। इसलिए हमेशा सजग रहें,सावधान रहें,और ऐसे संक्रमण से बचे रहें। तभी जीवन नैया सच्चे अर्थों में पार उतर पाएगी। मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि यदि आप सावधानी का कवच-कुंडल धारण करते हैं तो निसंदेह आपको कोई पराजित नहीं कर सकता। और इस प्रकार आप एक अजेय योद्धा साबित होंगे। इसमें कोई संशय नहीं। इसलिए ऐसे दुश्चरों से हमेशा सजग रहें,ताकि उनकी चालाकी स्वयं चलने के काबिल ना हो सके। अविश्वसनीयता के इस युग में आपके 1 फीट की दूरी पर 6 फीट का दुष्ट आत्मा खड़ा है,इसलिए उसके संक्रमण पर आक्रमण की तैयारी शुरू कर दें। तभी स्वाहा की ध्वनि हर ओर सुनाई देगी।
