• बिहार में शराबबंदी लागू फिर भी शराब का कारोबार जारी
पटना: ये बिहार है श्रीमान् जिसकी तुलना जंगल राज से किया जाता है। बिहार की तुलना जंगल राज से हो यह कोई विचित्र बात नहीं है। जिन लोगों पर शराबबंदी लागू करने का दायित्व दिया गया है वही भले मानस लोग शराब एवं
बालू माफियाओं से साठ-गांठ कर उसे बदनाम किया जा रहा है। हाल के दिनों में. आए दिन समाचार पत्रों, सोशल मिडिया और न जाने क्या क्या समाचार पत्र के आधुनिक साधन है' उनके द्वारा समाचार प्रकाशित हो रहे है लेकिन ये शराब एवं बालू का अवैध कारोवार रूकने वाला नहीं है। दैनिक जागरण में छपे दीधा थाना की कहानी से लोग रुबरु हुए हैं। पटना में आबकारी विभाग का मुख्य कार्यालय कुम्हरार गुमटी से उत्तर अवस्थित है वहीं सिपाही एवं पदाधिकारी एवं दलाल उसमें लिप्त हैं। • हद तो यह कि काले कारनामे में यहां चाय पहुंचाने वाले लोग अर्थात चाय दुकानदार तक इस अवैध धंधे में संलिप्त है। अवैध कमाई का यह जरिया उतना सटीक है कि कर्मचारी दिन दुना रात चौगुना कमाई करते हैं है यही कारण है कि इसपर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है अगर संलिप्त कर्मचारी पकड़े भी जाते हैं तो पुनः ये बहाल हो जाते हैं। इन सभी काले कारनामे करने वाले अधिकारियों को जब तक सेवा से बर्खास्त नहीं किया जाएगा तब तक यह खेल यूं ही चलता रहेगा ।। ऐसा मानना है सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज के बिहार ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार जी का ।

