बिहार के सरकारी विद्यालयों में नामांकन घोटाला


पटना: बिहार के सरकारी विद्यालयों में नामांकन क्यों हो रहा था इसका जवाब अब बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार जी, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जी, शिक्षा विभाग के मंत्री डॉ चंद्रशेखर जी, सचिव के.के पाठक जी को विदित हो रहा है। आश्चर्य की बात है कि इस बिहार में केवल सरकारी लाभ के तहत साईकिल, पोशाक, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति के लिए ही बच्चों का नामांकन हो रहा था।  और सरकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक मालामाल हो रहे थे। दैनिक समाचार पत्र में छपे 21 लाख विद्यार्थीयों का नामांकन रद्द इस बात का पुख्ता प्रमाण माननीय मुख्यमंत्री जी का दे रहा है


 कि बेहतर पढ़ाई के लिए बच्चों का हुजूम नहीं जुट रहा था बल्कि सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए ही बच्चे नामांकित हो रहे थे।  और यह खेल जबसे सरकार ये योजना चला रही है मुफ्त साईकिल, छात्रवृत्ति मध्याहन भोजन, किताब, ड्रेस तब से ही यह खेल बिहार के सभी विद्यालयों में चल रहा है। पदाधिकारी आंखें बन्द कर इसका कमिशन का प्रतिशत बटोर रहे हैं उन्हें क्या यह नहीं पता था कि आखिर ये बच्चे कहाँ पढ़ रहे हैं केवल और केवल सभी जगह लुट खसोट मचा था। अब बिहार के माननीय मुख्यमंत्री जी को चाहिए कि सभी प्रधानाध्यापकों का वेतन बन्द कर उनसे लुट का हिसाब इनके वेतन से भरपाई करवायें, तथा कुछ प्रधानाध्यापक सेवा निवृत हुए हैं उनके सेवा काल में हुए भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार मानते हुए उनके पेंशन से राशि वसूला जाना चाहिए ऐसा मानना है 'सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज बिहार के उप ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार जी का ।

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SEEMANCHAL EXPRESS

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