पटना [ बिहार ] : विजया दशमी के उपलक्ष्य में बिहार की राजधानी पटना के एतिहासिक गांधी मैदान में रावण, कुंभकरण एवं मेघनाद का पुतला जलाया गया, जिसे लोग असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में जानते, एवं सुनते हैं।
इस पुतला दहन में मुख्य भुमिका बिहार के कई राजनेता निभा रहे थे जिनके हाथ में सत्य रूपी तीर धनुष लिए थे और आततायी रावण के साथ कुंभकरण एवं मेघनाद को धाराशायी, करते दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान परिवेश में इन राजनेताओं के "अन्दर भी रावणत्व समाया हुआ' है।
इनके अन्दर भी, लोभ, मोह, मद, अहंकार, छल, धुर्तता जैसे कई तरह के रावणत्व समाया हुआ है आखिर इन राजनेताओं के अंदर का रावणत्व कब और कैसे धाराशायी होगा विचारणीय प्रश्न है। बिहार वासी जो मुक दर्शक बनकर ये सब देख एवं समझ रहे हैं आखिर कब उन सबों के अंदर समाए हुए रावणत्म को भस्म करेगें या इसी तरह रावणत्व के आतातायी को उस जमाने में लोग यह सब देख रहे थे
उसी तरह अभी वर्तमान समय में देखते रहेगें। बिहार वासियों को यह समझना चाहिए कि जाति, धर्म से, उपर उठकर अपने उपर सवार रावणत्व को जल्दी ही खत्म, किया जाना चाहिए तभी असत्य पर सत्य की विजय, अधर्म पर धर्म की विजय चरितार्थ होगा। ऐसा मानना सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज बिहार के उप ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार जी का है



