पटना, (बिहार) ! वर्तमान समय में दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, छठ पूजा त्योहार गुजर रहे है इस परिदृश्य में, दशहरा यानि दुर्गा पूजा समाप्त हुआ। जिसमें एक से बढ़कर एक मूर्ति स्थापित हुई, उसी तरह एक से बढ़कर एक पूजा पंडालों का निर्माण हुआ। जिसमें 1 लाख से करोड़ों का लागत आया यह बात स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए, साथ ही कुछ समाचार पत्रों प्रबन्धक तथा स्थानीय संपादक डाँडिया नृत्य को प्रोत्साहन देने हेतु जहाँ डांडिया नृत्य का आयोजन था, स्वयं उपस्थित हुए। इन नृत्य स्थलो को फोक्स बहुतायत से मिलता है देश की 80% प्रतिशत, आबादी महंगाई की मार से त्रस्त है वहीं जो अपने आप को समृद्धि हासिल कर चुके हैं, वो दिखावे पर दिखावे में नजर आ रहे हैं। यह दिखावा ही समाज में विकृतियाँ पैदा कर रहा है शायद समृद्धि पाए लोग अपने अड़ोस-पड़ोस के गरीबों को थोड़ा भी मदद किए होते तो आज समाज में पहले की भाँति शांति स्थापित होता। लोगों में मेल-मिलाप बढ़ता लोगों में वैवनस्य की भावना घर नहीं करता, किन्तु ऐसे पर्व त्योहारों में भी देश की 80% प्रतिशत आबादी घुटन की जिन्दगी जी रहे हैं। समाज का पतन "होते जा रहा है समाज में सामंजस्य स्थापित नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही हर वर्ग के राजनीति करने वाले लोग अपना-अपना वोट बैंक बनाने हेतु लोगों के बीच हर पूजा पंडालों में जाकर उपस्थिति दर्ज कर रहे है इससे ऐसा लगता है कि धार्मिक कार्यों में आस्था कम और दिखावा ज्यादा हो रहा, धार्मिक कार्यों के आड़ में राजनीतिक पार्टियों के लोग होर्डिंग पोस्टर लगाकर दिखावा ज्यादा कर रहे हैं ऐसा मानना सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज बिहार के उप ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार जी का है यह व्यक्तिगत विचार इस दौर के परिदृश्य को देखते हुए दिया गया है
• [ किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के निजी आस्था या भावनाओं को आहत करने के विचार से नहीं लिखा गया है ]
