बिहार शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव के० के० पाठक के फरमान भी बेअसर, अशोक कुमार


बिहार शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव के० के० पाठक के फरमान भी बेअसर, अशोक कुमार




पटना: बिहार के सरकारी विद्यालयों में लाखों संसाधन उपलब्ध करवाया जाय, बहुतेरे प्रलोभन दिया जाय, किंतु पठन पाठन दुरुस्त नहीं होगा तो बच्चे किसी भी सुरत में प्रतिदिन विद्यालय नहीं जाये‌गें यह कड़वा सच है। जो शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव शिक्षा मंत्री एवं मुख्य मंत्री माननीय श्री नीतिश कुमार जी सभी को पता हो चुका है। बच्चों को साईकिल का प्रलोभन, ड्रेस का प्रलोभन, निःशुल्क किताब का प्रलोभन, बच्चों को छात्रवृति का प्रलोभन, मध्याहन भोजन का प्रलोभन यह केवल ऐसी योजना है जिसको सरकार अपने बजट बनाकर दुपयोग कर रही है। इसका सही फायदा विद्यालय समिति के लोगों को विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारीयों को तथा जिला शिक्षा अधिकारियों को मिलता है। अगर सभी विद्यालय प्रधानाध्यापकों को नामांकित बच्चों के रजिस्टर से मिलान किया जाय तो अधिकांश प्रधानाध्यापकों तथा प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारियों की मिली भगत का सारा काला चिट्टा खुलेगा किंतु के 0 के0 पाठक ऐसा कर नहीं पायेंगें। केवल राज्य के किसी जिला में जाकर दो चार विधालयों का निरीक्षन कर अपना नाम रौशन का रहे है और  कुघेरु लोगों से वाहवाही लूट रहे हैं हकिकत उन्हें शायद पता ही नहीं है। 

Post a Comment

SEEMANCHAL EXPRESS

Previous Post Next Post