• आन, बान और शान का संगम है तिरंगा
• आजादी के आंगन में तेरी यादों की तस्वीर सजाता हूं।
आलेख: दिवाकर पाठक, कंडाबेर हजारीबाग झारखंड
आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ अवसर पर परम सम्मानीय प्रधानमंत्री जी की एक व्यापक अपील राष्ट्र के नाम,हर घर तिरंगा अभियान। इस अप्रतिम यात्रा के अंतर्गत पिछले वर्ष की भांति संपूर्ण राष्ट्र वादियों को अपने घरों में राष्ट्र गौरव चिन्ह तिरंगा को फहराना है। यह देश के इतिहास में एक स्वर्णिम काल है,जब संपूर्ण राष्ट्रवादी एक साथ हर घर तिरंगा अभियान की शान को सिद्ध कर रहे हैं। बड़े गर्व और गौरव का यह अद्भुत क्षण वाकई में एक नया इतिहास लिखने में सफल साबित होगा। यहां एक महत्वपूर्ण सवाल उदित हो रहा है। हर घर तिरंगा अभियान का मकसद क्या है? जिसका उत्तर बड़ा ही दिलचस्प और मार्मिक है। हमारा राष्ट्रध्वज हमारी आन,बान और शान का प्रतीक है। तिरंगे में स्थित तीनों रंगों के अलग-अलग मायने हैं। केसरिया बल भरने वाला, श्वेत रंग सच्चाई,हरा रंग है हरी हमारी,धरती की अंगड़ाई और कहता है चक्र हमारा कदम कभी न रुकेगा,हिंद देश का प्यारा झंडा ऊंचा सदा रहेगा। अर्थात् संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोना ही हमारे तिरंगे का मकसद है। वास्तव में हम बड़े धन्य हैं,जो भारत में जन्म लिए हैं। क्योंकि भारत के सिवा दुनिया में कोई और देश नहीं,जो दूसरे धर्मों का सम्मान करे। ऐतिहासिक पन्ने गवाह हैं कि हमारा सर सदैव दूसरे के सम्मान में झुका है। हम स्वयं भूखे रहकर भी दूसरों को भोजन कराने की परंपरा को निभाने वाले हैं। हमारे देश को छोड़कर दुनिया के बाकी देश सर्व धर्म की जगह,स्वयं धर्म का समर्थक हैं। यही कारण है कि भारत अन्य देशों की तुलना में बिल्कुल अलग है। यहां हर किसी का सम्मान है। तिरंगे में स्थित तीनों रंग,विविधता में एकता को प्रदर्शित करते हैं। यही हमारा मूल मंत्र है। साथ ही यह प्रेरणा प्रदान करता है कि सच्चाई के साथ समय का अनुपालन करते हुए शक्ति का संचार की जाए। तभी हमारी जीत सुनिश्चित होगी।
अब हम शीर्षक के साहित्य को प्रस्तुत करते हैं। इसका साहित्य कहता है कि तिरंगा हमारी शान कैसे है? यहां यह स्पष्ट कर दूं कि प्रत्येक राष्ट्र का राष्ट्रध्वज उसकी शान का प्रतीक होता है,क्योंकि जिस प्रकार कोई व्यक्ति उच्च पदस्थ होने पर उसे गौरव की अनुभूति प्राप्त होती है, ठीक उसी प्रकार हमारा तिरंगा सर्व शीर्ष में स्थित होकर हमें गौरवान्वित करता है और यही हमारी शान का प्रतीक है। हमारी स्वतंत्रता का स्वरूप है। यह हमें एहसास दिलाता है कि इस तिरंगे के लिए हमने इसकी क्या कीमत चुकाई है। इसे पाने के लिए हमारे अनेक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। तब यह तिरंगा हमारी शान का प्रतीक बन सका। ऐसे में यदि कोई मेरे तिरंगे का अपमान करें, तो यह कतई बर्दाश्त नहीं। क्योंकि हम सर्वधर्म समभाव की भावना से ओतप्रोत हैं। यदि हम दूसरे देशों और धर्मों का आदर करते हैं, तो हमारे देश और धर्म का भी आदर होनी चाहिए।
अब हम प्रधानमंत्री जी की हर घर तिरंगा अभियान की कड़ी को प्रस्तुत करते हैं। माननीय मोदी जी की यह मुहिम वास्तव में एक मास्टर स्ट्रोक साबित हुई,क्योंकि इस मुहिम का ना तो विपक्ष सीधे तरीके से विरोध कर राष्ट्र विरोधी कहलाने का जोखिम उठाना चाहा और यदि ऐसे में वह इसका समर्थन करता है,तो वह मोदी के समर्थन में खड़ा है। विपक्ष के सामने यह बड़ा ही जटिल प्रश्न है,जिसका उत्तर किसी भंवर से कम नहीं। हालांकि यदि वह इसका समर्थन करता है,तो उसकी जमीर और मजबूत होगी। क्योंकि वास्तविकता की वकालत हर किसी को करनी चाहिए। आजादी के अमृत महोत्सव में हर घर तिरंगा अभियान का उद्देश्य भी यही है कि राष्ट्रवाद की भावना से भटके लोगों में एक नई शक्ति का संचार की जा सके। जन जागरूकता की यह ध्वनि हर ओर सुनाई पड़े,तभी हमारा राष्ट्र सच्चे अर्थ में विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा हो सकेगा। जब तक प्रत्येक राष्ट्रवासी में भारत माता के प्रति समर्पण का भाव स्थापित नहीं होगा,तब तक सर्व कल्याण मंत्र सार्थक सिद्ध नहीं होगा। यदि वास्तव में प्रत्येक देशवासी के जेहन में देश प्रेम की भावना बलवती हो तो फिर संपूर्ण राष्ट्र एक रेखा में रेखांकित होगा। फिर विकास के बीज तो स्वयं अंकुरित होंगे ही। मतलब स्पष्ट है कि निर्मल मन से होगा राष्ट्र जगमग। अर्थात् जगमग,जगमग ज्योति जली है। मां भारती की आरती होने लगी है। यहां यह स्पष्ट है कि यदि मां भारती की आरती एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में हम सभी करते हैं,तो उसका अनुकूल फल हमें अवश्य प्राप्त होता है। इसमें कोई संशय नहीं। इसलिए एक सच्चा राष्ट्रभक्त बनने की दिशा में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। मोदी जी का यह अभियान वास्तव में देशवासियों के जेहन में राष्ट्रवाद अमूल्य मंत्र का संचार करने में सफल हुआ है। हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और ऐसे में यदि हमारा हृदय अमृतमय ना हो जाए,तो फिर इसके क्या मायने हैं? अमृतमय का अर्थ है एक सच्चा राष्ट्रभक्त बनकर देश के असामाजिक तत्वों का बहिष्कार करना। हम स्वतंत्रता की 76वीं वर्षगांठ मना रहे हैं,लेकिन अब भी हमारी स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है। क्योंकि आज भी राष्ट्र के अंदर राष्ट्रीयता को राख बनाने वाले विषैले तत्व मौजूद हैं। अर्थात् भय,भूख,भ्रष्टाचार और हत्या जैसे बाधक तत्व आरोही क्रम में ही बढ़ते चले जा रहे हैं। नारियों के सम्मान की बात करने वाले देश में ही आज उनका अपमान हो रहा है और बहुत सारे कुकृत्य जुल्म बरपाए जा रहे हैं। उनकी सौदेबाजी की जा रही है। यहां यह स्पष्ट कर दूं कि नारी शक्ति का प्रतीक है और ऐसे में यदि हम इन्हें प्रताड़ित करते हैं तो हमारी शक्ति का संहार तय है। हालांकि पड़तारना और हत्या तो किसी की भी नहीं करनी चाहिए। यदि हमारे बुरे कर्मो के द्वारा हमारी शक्ति ही नष्ट हो जाए तो फिर केवल जिंदा लाश हैं। और यह बिल्कुल प्रमाणित है की नारी सम्मान के बिना शक्ति नहीं प्राप्त की जा सकती। इसलिए सभी के सम्मान का इस आजादी पे संकल्प लें। दूसरी ओर बड़े-बड़े नेताओं और माफियाओं के यहां से अनगिनत अवैध संपत्ति प्राप्त हो रही है। इस प्रकार यह स्पष्ट है की आजादी के इतने लंबे अरसे बाद भी हमें परेशान करने वाले दानव हमारे बीच व्याप्त हैं। मतलब हमारी माताएं बहनें इन दानवों का निरंतर शिकार हो रही हैं। एक व्यक्ति रात में भूखे सोने को मजबूर है,वहीं दूसरा व्यक्ति खाने के बाद बचा खाना बर्बाद कर देता है तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि हम कितने आजाद हैं? इसलिए सर्वप्रथम इन मनचलों पर नकेल कसी जाए। तभी हमारा यह अमृत महोत्सव सार्थक सिद्ध होगा। यदि हम अपने तिरंगे के शान की बात करें,तो रूस और यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय छात्रों का अपने हाथों में तिरंगा लेकर वतन वापसी का उदाहरण है।और तो और पाकिस्तानी लोग भी हमारे तिरंगे का सहारा लेकर वहां से निकलने में कामयाब हुए। ऐसे में हमारे तिरंगे की ताकत और सम्मान को बड़ी ही सहजता के साथ समझा जा सकता है। इसलिए हर घर तिरंगा अभियान में अवश्य अपनी भागीदारी निभाकर देश के काम आने का संकल्प लें। यही इस अभियान की मुख्य भूमिका है। आप हर घर तिरंगा अभियान के इस परिदृश्य की परिकल्पना करें,कितनी मनमोहक है। तिरंगे का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है। इसलिए इस अभियान का साक्षी बनकर तन समर्पित,मन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं के भाव का अभिवादन करें। यही राष्ट्र की प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वरना! केवल मूकदर्शक बने रहने का कोई औचित्य नहीं। इसलिए राष्ट्र प्रेम से बड़ा कोई धर्म नहीं। ऐसा मजबूत संकल्प लें की गद्दार भी इस पवित्र गंगा में डुबकी लगा कर स्वयं को शुद्ध कर सकें और अपने मुक्त कंठ से यह कह सके की आजादी के आंगन में तेरी यादों की तस्वीर सजाता हूं। गाता हूं कुछ गीत इस दिवस पे और स्वतंत्रता की रस्में निभाता हूं। इस प्रकार हमारी आन,बान,और शान का संगम है तिरंगा।
