• 28 फरवरी 2005 को दरभंगा राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की स्थापना हुई थी
रिपोर्टर • प्रदीप कुमार
पटना। मखाना अनुसंधान केंद्र दरभंगा को फिर से मिला राष्ट्रीय दर्जा, अब मछली समेत जलीय फसलों पर भी होगा अनुसंधान: ऋषिकेश अब मखाना के साथ मछली व जलीय फसलों पर भी दरभंगा राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में अनुसंधान होगा। अब फिर से यह केंद्र राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के नाम से जाना जायेगा। साथ ही केन्द्र के अनुसंधान के क्षेत्र में भी विस्तार कर दिया गया है। इससे क्षेत्र वासियों में हर्ष का माहौल है। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद मखाना अनुसंधान केंद्र को सोमवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ने पुनः उसकी गरिमा व सोहरत को लौटाते हुए इसे राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र का दर्जा दे दिया। दरभंगा राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की स्थापना 28 फरवरी 2002 में की गयी थी। स्थापना के तीन साल बाद ही 2005 में इस का नेशनल स्टेटस छीन लिया गया था। इसका संचालन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के पूर्वी अनुसंधान परिषद् पटना से होता था। इस कारण इस का दायरा सिमट गया था। अनुसंधान समेत अन्य किसी भी कार्य के लिए केंद्र को पटना से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब यह केंद्र के नियंत्रण में संचालित होगा। इसका अपना बजट होगा यह केंद्र अब सीधे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, दिल्ली के कृषि अभियंत्रिकी प्रभाग से संचालित होगा। जारी आदेश के अनुसार अब इस केंद्र के दायरे में काफी विस्तार होगा। मखाना के साथ-साथ मछली एवं अन्य जलीय फसलों पर वैज्ञानिक स्वतंत्र रूप से रिसर्च कर सकेंगें। नये आदेश के बाद केंद्र में वैज्ञानिकों व टेक्नीशियनों की संख्या बढेगी। भवन के साथ ही अन्य मूलभूत व्यवस्था में विस्तार किया जायेगा। मखाना अनुसंधान की ढांचागत स्थिति में बेहतर बदलाब की बात कही जा रही है। मिथिली के कृषि क्षेत्र में इस का सकारात्मक असर होगा। मखाना, मछली व स्थानीय जलीय फसलों के क्षेत्र में नये अनुसंधान के द्वार खुलेंगे। इस मौके पर बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने हर्ष प्रकट करते हुए कहा कि यहां के लोगों के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी है। स्थानीय फसलों को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलेगी। मालूम हो की बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ द्वारा लम्बे अर्से से इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जा रहा था और लड़ाई लड़ी जा रही थी। यह संघ की बहुत बड़ी सफलता है। इस उपलक्ष्य पर संघ के प्रबंध निदेशक ने प्रधानमंत्री एवं कृषि मंत्री को पत्र लिखकर धन्यवाद दिया।
