छठ घाटों पर सफाई और छठ व्रतियों की सुविधा के नाम पर भारी लूट





पटना : बिहार प्रांत में प्राचीन काल से ही छठ व्रत मनाने की परंपरा रही है। द्वापर काल त्रेता काल और अब कलयुग में भी छठ व्रत का प्रचलन जोरों पर है परंतु आज के समय में छठ व्रत मनाने की परंपरा आधुनिक शैली के अनुकूल हो गया है यह प्रचलन प्राचीन काल के समय में नहीं के बराबर था प्राचीन काल में दुखों से गिर जाने यह महा विपत्ति आने पर भगवान सूर्य यह साक्षात देवता है उन्हें मनाने के लिए छठ व्रत किया जाता था वर्तमान समय में सरकार भी छठ व्रत के नाम पर होने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर भारी भरकम खर्च करती है इस खर्च में सरकार ठेकेदारों को निविदा द्वारा घाट मरम्मत या दुरुस्त करने समेत तमाम तरह की सुविधाओं के लिए ठेकेदारी देती है और सरकारी खजाने से छठ व्रत के नाम पर भारी-भरकम रकम ठेकेदार के पॉकेट में चला जाता है ठेकेदार द्वारा छठ घाट के नाम पर मरम्मत के नाम पर कहां क्या सुविधा है जनता को मिलती है या नहीं मिलती है इसका देखरेख यह खबर लेने वाला कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं होता है केवल मंत्री गण स्ट्रीमर में बैठकर गंगा में मुआयना करते हैं। घाट घाट जाकर देख नहीं पाते तो ऐसे मुआयना का क्या फायदा छठ व्रतियों को मिलता है या नहीं यह एक प्रश्नवाचक प्रश्न है कभी भी सरकार गंभीरता से विचार नहीं करती है

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