• आलेख : दिवाकर पाठक, हजारीबाग, झारखंड। Email: newsincharge@gmail.com)• अपराध की प्रयोगशाला बना झारखंड, इस प्यार को क्या नाम दूं
हजारीबाग, झारखंड : सूबे की वर्तमान परिदृश्य की पटकथाओं पर यदि दृष्टि केंद्रित की जाए,तो एक अपराधिक रेखा रेखांकित नजर आती है। ऐसा जान पड़ता है,मानों झारखंड अपराध की प्रयोगशाला में तब्दील हो चुका है। और नए-नए प्रयोग गढ़े जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है। क्योंकि संपूर्ण राज्य में अपराधी के रूप में विषैले वायरस व्याप्त हैं,जो प्रदेश को संक्रमित करने में लगे हैं। बताते चलें कि राज्य का चर्चित अंकिता सिंह हत्याकांड ने संपूर्ण सूबे को शर्मसार कर दिया। इस घटना ने राज्य ही नहीं,देश को भी दोमुहाने पे लाकर खड़ा कर दिया। लोगों के जेहन में यह बड़ा सवाल है कि आखिर हम कैसे सुरक्षित रहें और हमारी बहन-बेटियां कैसे सुरक्षित हों? चारो ओर भय का माहौल व्याप्त है। त्राहिमाम की इस दुनिया में कौन हमें बचाए? यह सुलगते सवाल हर किसी के लिए चिंतनिय है। जिसका जवाब अभी तक संतोषप्रद नहीं है।
अब हम अंकिता हत्याकांड के शब्द चित्र को प्रस्तुत करते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं। दुमका की रहने वाली अंकिता सिंह को पड़ोस में रहने वाला शाहरुख ने धर्म परिवर्तन कर जबरन शादी का दबाव डाला। उसने उसकी बात नहीं मानी,तो उस शातिर ने रात में एक प्लानिंग के तहत उसी की खिड़की से उसके ऊपर पेट्रोल छिड़ककर माचिस मार कर फरार हो गया। वह जलती अवस्था में बाहर निकली और अपने ऊपर पानी डाली। आनन-फानन में उसे दुमका हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां से उसे रिम्स रेफर कर दिया गया। 5 दिनों तक तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई। इस चित्र से उद्धृत कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं,जिसका उत्तर हमें गंभीरता से समझने की जरूरत है। पहला सवाल क्या यही प्यार है? वास्तव में क्या इसे प्यार का नाम देना उचित है? नहीं ना,क्योंकि प्यार में आत्मा का मिलन होता है। न की जबरन और धोखाधड़ी का जुल्म। यह तो उस मासूम के ऊपर जबरन जुल्म ही परपाये गए न। इसे कहीं से भी प्यार का नाम देना उचित नहीं होगा? यहां यह स्पष्ट है कि शातिर ने सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया। बाद में इसकी पुष्टि भी हुई। क्योंकि पुलिस द्वारा इस हत्याकांड के दो आरोपियों शाहरुख और नईम की गिरफ्तारी के बाद सब कुछ स्पष्ट हो गया। नईम ही असली मास्टरमाइंड निकला। उसने ही इस घटना के लिए शाहरुख को बहकाने का काम किया। पुलिस रिमांड में पूछ-ताछ से यह बात सामने आया कि यह साजिश बांग्लादेशी आतंकी संगठन कहरता के सीक्रेट मिशन अंसार उल बांग्ला का मिशन गैर मुस्लिम लड़कियों से शादी कर धर्म परिवर्तन करना है। यह बड़ी साजिश का छोटा हिस्सा है। मतलब इसकी फंडिंग एक आतंकवादी संगठन कर रहा है। ऐसे में इसे लव जिहाद ही कहेंगे। जो भोली-भाली लड़कियों को अपने मकड़जाल में फंसा कर उसका शोषण करता है। और हम इसे प्यार का नाम देकर,ऐसे अपराध को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं। तभी तो ऐसे अपराध निरंतर बढ़ते चले जा रहे हैं। यहां एक बात और स्पष्ट कर दूं कि इस केस की जांच में जुटे डीएसपी नूर मुस्तफा ने अपने अपराधी को बचाने के लिए लड़की की उम्र एफआईआर में 17 की जगह 19 लिखकर उसे बालिग बता कर, केस को कमजोर बनाने में लगे थे। जिससे उनका अपराधी बच सके। तभी तो शाहरुख पुलिस की गिरफ्तारी में होते हुए भी हस रहा था। ऐसे में आप स्वयं समझ सकते हैं कि हमारे शासन का प्रशासन कैसा है,जो अपराधियों के साथ खड़ा है। ऐसे प्रशासनिक पदाधिकारी को तो अति शीघ्र बर्खास्त कर देना चाहिए। क्योंकि विश्वासघात से बड़ा कोई पाप नहीं। हालांकि बाद में इस केस से बाहर कर दिया गया। इसलिए पाप का प्रायश्चित तो होना ही चाहिए। तभी तो लोग गलत करने से डरेंगे।
• अब हम मौत के कारणों पर प्रकाश डालते हैं।
आखिर अंकिता की मौत कैसे हुई? यहां मौत के कारणों को भी ध्यान से समझने की जरूरत है। रिम्स के जिस बर्न्स वार्ड में उसे रखा गया था। वहां एसी तक की व्यवस्था नहीं थी। और हम सभी जानते हैं कि जलने के बाद काफी जलन होती है। वह लगभग 90% जल चुकी थी। अव्यवस्था के इस वार्ड में तड़पते हुए उसने 5 दिनों तक खुद को जिंदा रखा और अंत में बेसहन के बीच हमेशा-हमेशा के लिए आंखें मूंद ली। ऐसे में आप स्वयं समझ सकते हैं कि इस मौत का दूसरा दोषी सूबे सरकार भी है। क्योंकि जिस देश में 49000 एंबुलेंस हैं,तो क्या उसे एयर एंबुलेंस से एम्स दिल्ली ले जाकर इलाज नहीं करवाया जा सकता था। यदि समय रहते उसे एम्स ले जाया जाता तो शायद उसकी जान बच जाती। रिम्स की अव्यवस्थाओं से तो मैं स्वयं परिचित हूं। कहने को तो राज्य का सबसे बड़ा हॉस्पिटल,पर व्यवस्थाओं में सबसे निम्न। यहां तक कि पेशेंट को देखने जो मेडिकल स्टूडेंट्स आते हैं,वह भी अव्यावहारिक होते हैं। जिसके कारण लोग असहज महसूस करते हैं। इसकी मौत के बाद सूबे सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप लग रहा है। क्योंकि नदीम अंसारी के इलाज के लिए सरकार ने हेलीकॉप्टर भेज दिया था। राज्य में कुछ दिनों पहले नमाज के नाम पर दंगा हुआ था। जिसमें घायल हुआ था रिजवान। जिसे यहां की सरकार सरकारी खर्चे से एअरलिफ्ट करके उसका इलाज करवाई। पर अंकिता 5 दिनों से तड़पती रही और मुख्यमंत्री नौकायन करने में व्यस्त रहे। ऐसे में इस मौत के मायने बिल्कुल स्पष्ट है। जिसे कहीं से भी गलत नहीं कहा जा सकता। घटना के तुरंत बाद भी मुख्यमंत्री के भाई विधायक बसंत सोरेन पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचे थे। इस पर जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी अपनी रोटी सेकने के लिए ऐसा कर रही है। इस पर एक बात यह भी जान लेना चाहिए कि यदि हम अच्छा करेंगे तो मुझ पर उंगली नहीं उठेगी।
हालांकि इसके बाद सरकार ने पीड़ित परिवार को₹1000000की सहायता राशि प्रदान की। इसके साथ ही सांसद कपिल मिश्रा,डॉ निशिकांत दुबे,मनोज तिवारी और उपदेश राणा ने पीड़ित परिवार से मिलकर सहायता राशि प्रदान कर, उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री जी ने भी इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने की बात कही। साथ ही यह भी कहा की दोषी बक्शे नहीं जायेंगे। यह तो केवल एक अंकिता की बात हुई। इस तरह का अनेक अपराध बेखौफ होकर घटित किए जा रहे हैं। गढ़वा में शहजाद नाम का लड़का रविंद्र बनकर,हिंदू लड़की से शादी करता है। सिमडेगा में नईम मियां है,जो संदीप सिंह बनकर विवाह करता है। सवाल है कि पूरी आईडेंटिटी के साथ ऐसा क्यों नहीं करते? अपने कौम की लड़कियों के साथ भी ऐसा ही करते हैं क्या? चतरा में काजल कुमारी के ऊपर एसिड अटैक होता है। बेड़ो प्रखंड के डोरंडा पंचायत नरकोपी थाना क्षेत्र के सेरो गांव में 28 अगस्त रविवार की दोपहर नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ 26 वर्षीय शहरुद्दीन अंसारी ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। लोहरदगा में नाबालिग के साथ रबानी अंसारी ने दुष्कर्म किया। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी जेल भेजा गया। वही दुमका में पुनः10 दिनों के अंदर नाबालिग आदिवासी बेटी की हत्या अरमान अंसारी ने की और शव को पेड़ पर लटकाया। दूसरी ओर स्थिति यह है कि प्रदेश के 400 स्कूलों में आज भी प्रार्थनाएं हाथ जोड़कर नहीं हो रही हैं। क्योंकि कुछ दिनों पूर्व राज्य के कुछ इलाकों में समुदाय विशेष द्वारा रविवार की छुट्टी की जगह शुक्रवार को छुट्टी करवाया जा रहा था। यह कहा जा रहा था कि यहां हमारी आबादी अधिक है, इसलिए छुट्टी और प्रार्थना शरिया कानून से होगा। क्या इस तरह की चीजें सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ी नहीं करती? यह सरकार को स्वयं समझना चाहिए। इसके लिए स्वयं के दोष को चिन्हित करना होगा। क्योंकि कहा गया है कि खुद सुधार लाएं। तभी देश सुधरेगा। ऐसे जघन्य अपराधों से प्रदेश शर्मसार है।
वहीं अंकिता मामले में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी है कि झारखंड में ऐसा लगता है कि कानून का शासन ही नहीं रह गया है। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की टिप्पणी है कि झारखंड में कानून का राज नहीं है। कानून तोड़ने वालों में कानून का भय नहीं है। दूसरी टिप्पणी झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए की है। इसके साथ ही दुमका डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने कहा,शाहरुख और नईम का केस कोई नहीं लड़ेगा। बार एसोसिएशन का यह बात,उदारता का परिचय है।कुल मिलाकर अंकिता की मौत से उभरे सवालों का सारांश है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे सिस्टम के साथ-साथ कहीं ना कहीं हमारी बेटियां भी कम दोषी नहीं हैं। क्योंकि जो लड़कियां पढ़ लिखकर बहकावे में आकर,अपने मां-बाप के अरमानों को चकनाचूर कर यह कहती हैं कि मेरा अब्दुल वैसा नहीं है। ऐसी निम्न सोंच वाली लड़कियां इस तरह की घटना को निमंत्रण देने का कार्य करती हैं। इसे आप स्वयं समझ सकते हैं कि अपराध की अग्नि कहां से प्रज्वलित हो रही है? एक घटना थमती नहीं,की दूसरी घटना घटित हो जाती है। यदि समय रहते सरकार ऐसे जघन्य अपराध पर लगाम नहीं लगाई तो ऐसे में विरोध के बादल के बीच भींगना तय है। इसके लिए सरकार को पारदर्शी होने की जरूरत है। साथ ही कानून का शिकंजा भी कठोर करना होगा। क्योंकि अपराधियों का बेखौफ होना राज्य के लिए ठीक नहीं। सरकार ऐसे अपराधियों के लिए कड़े कानून लाए। तभी सरकार की नियत पर शक नहीं होगा। ऐसे अपराधियों को अविलंब फांसी की सजा का प्रावधान हो। सऊदी अरब जैसे देशों में अपराधी जैसी घटना को अंजाम देता है।उसके साथ भी वैसे ही घटना की पुनरावृति कर,उसे दंडित किया जाता है। इसलिए उन देशों में घटनाएं ना के बराबर होती हैं। क्योंकि वहां कानून का राज है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बिल्कुल क्विक एक्शन वाली है। अपराधियों पर नकेल तुरंत कसी जाती है। तनिक भी देर नहीं। मरने से पहले अंकिता ने भी कहा था कि मैं जिस प्रकार तड़प कर मर रही हूं,वैसे ही उसे भी मार दिया जाए। इसलिए इन तमाम हत्यारों पर कानून के हथौड़े बरपाए जाएं। तभी पीड़िता की आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसके साथ ही माता-पिता को चाहिए कि अपनी बेटियों को संस्कार से सुसज्जित करें और स्वयं सुरक्षा का कवच प्रदान करें। क्योंकि विवेकानंद जी ने कहा था कि
कमजोर होना सबसे बड़ा पाप है। इसलिए चट्टान के समान मजबूत बनें। ताकि कोई आप से टकराकर स्वयं चूर-चूर हो जाए। हमें अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी। यह अमोल मंत्र से हर कोई दीक्षित हो। तभी जीवन ज्योति का अमर पुंज प्रवाहित हो सकेगा। वरना! अपराध के आंगन में अपराधी खेलते नजर आएंगे।
