· लाल डोरा बढ़ाने, कृषि भूमि से पानी की निकासी और स्किल यूनिवर्सिटी शुरू करने की मांग· सैनिक फार्म जैसी कॉलोनियों को नियमित करने और दुकानें डिसील करने का अनुरोध· दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों को फंड जारी न करने की शिकायत
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने राजधानी की कई बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना से एक शिष्टमंडल के साथ मुलाकात की। बिधूड़ी ने उन्हें इन समस्याओं का ज्ञापन सौंपा और उपराज्यपाल ने इन समस्याओं के शीघ्र समाधान का निर्देश दिया है। ज्ञापन में दिल्ली देहात की मांगों के अलावा दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों का आर्थिक संकट, सैनिक फार्म समेत 67 कॉलोनियों को नियमित करना, 5 सालों से सील पड़ी 15 हजार दुकानों को डिसील करना और जौनापुर में स्किल्स यूनिवर्सिटी का काम शीघ्र शुरू करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बिधूड़ी ने बताया कि उपराज्यपाल महोदय का रवैया अत्यंत सकारात्मक रहा और उन्होंने सभी समस्याओं को बड़े गौर से सुना। ज्ञापन में कहा गया है कि दिल्ली के गांव जौनापुर में ग्राम-सभा की जमीन पर सरकार द्वारा बनाए जाने वाली वर्ल्ड क्लॉस स्किल्स यूनिवर्सिटी का काम अभी तक शुरू नहीं किया गया है। नजफगढ़ क्षेत्र तथा रावता आदि दर्जनों गांवों में सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य जमीन पर बरसाती पानी के अलावा हरियाणा ड्रेन का गंदा पानी और आसपास बसी सैकड़ों अनधिकृत बस्तियों का गंदा पानी भर जाने के कारण किसानों की फसल तबाह हो जाती है। यहां से पानी की निकासी का उचित प्रबंध कराया जाए। दिल्ली के किसानों की दो और मुख्य मांगों को भी फौरन मानने का अनुरोध ज्ञापन में किया गया है-ये हैं लाल डोरा बढ़ाया जाए और किसी किसान की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने पर लगी रोक को भी तुरंत वापस लिया जाए।
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि ज्ञापन में दिल्ली सरकार द्वारा फंडेड दिल्ली यूनिवर्सिटी के 12 कालेजों में दिल्ली सरकार द्वारा फंड जारी न करने के मुद्दे को भी शामिल किया गया है। फंड जारी न होने से टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को सैलरी और अन्य फंड नहीं मिल रहे। दिल्ली की सैनिक फॉर्म जैसी लगभग 67 एफ्लूएंट कालोनियों को नियमित करने और वहां के निवासियों को मालिकाना अधिकार देने की मांग भी की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि दिल्ली में पिछले 5 सालों से लगभग 15000 सील पड़ीं दुकानों को शीघ्र डिसील कराने के लिए कदम उठाए जाएं क्योंकि इससे न केवल दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, बल्कि दिल्ली सरकार को भी राजस्व की हानि हो रही है।
