वंचित छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने वाले सीयूईटी को तुरंत रद्द करने की मांग



 

• केवाईएस ने सीयूईटी परीक्षा में भारी अफरा-तफरी की कड़ी भर्त्सना की!

• वंचित छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने वाले सीयूईटी को तुरंत रद्द करने की मांग की!

• यूजीसी अध्यक्ष के बयान की कड़ी निंदा की! सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए सभी सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में डेप्रीवेशन पॉइंट्स का प्रावधान करने की मांग उठाई!

क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) कॉमन यूनिवर्सिटीज एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) के आयोजन के दौरान हुए भारी कुप्रबंधन की कड़ी निंदा करता है। यह ज्ञात होना चाहिए कि सीयूईटी एक प्रवेश परीक्षा है जो राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की जा रही है और जो राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पाठ्यक्रम पर आधारित है। देश भर के छात्रों ने 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और कुछ राज्य विश्वविद्यालयों और निजी संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए परीक्षा के लिए आवेदन किया है। ज्ञात हो कि अचानक परीक्षा केंद्रों के परिवर्तन जैसी समस्याओं के चलते कई छात्र यह परीक्षा नहीं दे पाए। यूजीसी अध्यक्ष द्वारा यह कहा गया कि जो छात्र अपनी परीक्षा देने में चूक गए हैं, उन्हें किसी भी तरह की परीक्षा दोबारा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केवाईएस इस बयान की कड़ी निंदा करता है।


सीयूईटी के पीछे तर्क यह है कि इससे देश भर के उम्मीदवारों को समान मौका मिलेगा, क्योंकि दाखिले के लिए सभी प्रत्याशियों को एक सामान्य प्रवेश परीक्षा से गुजरना होगा । हालाँकि, यह दिखावा है क्योंकि सीयूईटी का वास्तविक उद्देश्य उम्मीदवारों की छंटनी करना है, न कि उनके लिए प्रवेश सुनिश्चित करना। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की सीटें देश भर में कुल सीटों का सिर्फ 5% है, और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों में सीटों के लिए बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा है। लेकिन, इन संस्थानों में सीटें बहुत सीमित हैं, और सीटों की संख्या के 10 गुना से भी अधिक छात्रों ने आवेदन किया है। इस प्रकार परीक्षण केवल उन्मूलन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और प्रवेश परीक्षा के नाम पर बहिष्करण को सुदृढ़ करने का काम करेगा।


प्रवेश प्रक्रिया के भीतर ये बार-बार परिवर्तन ऐसे विश्वविद्यालयों में व्याप्त ढांचागत मुद्दे, सीटों की भारी कमी, को छुपाने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली विश्वविद्यालय ने पिछले कुछ दशकों में कोई नया कॉलेज नहीं खोला है, जिसके कारण लाखों छात्र डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) और इग्नू जैसे उच्च शिक्षा के घटिया ओडीएल मोड के संस्थान को चुनने के लिए मजबूर होते हैं। उच्च शिक्षा के इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या में तेज वृद्धि के साथ, शिक्षा पर खर्च में वृद्धि करना और कॉलेजों और सीटों में वृद्धि करना आज के समय की मूलभूत मांग है। ज्ञात हो कि हर साल देश भर से लाखों छात्र प्रमुख विश्वविद्यालयों के विभिन्न पाठ्यक्रमों और विभागों में प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं। कटऑफ प्रणाली पर यह सवाल उठाया जाता रहा है कि यह विशेषाधिकार-प्राप्त पृष्ठभूमियों के छात्रों के पक्ष में थी। परंतु इसके बावजूद अभी भी इसी तरह की नीति सीयूईटी के माध्यम से लायी जा रही है, जिसमें सीधे तौर पर निजी स्कूलों के छात्र जो बेहतर बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के कारण अच्छे से शिक्षित हैं, वे सरकारी स्कूलों के छात्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। सरकारी विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षाओं की यह भेदभावपूर्ण प्रवेश नीति संपन्न पृष्ठभूमि के छात्रों को विशेषाधिकार प्रदान करती है। यह तथ्य है कि डीयू आवेदकों की संख्या और विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने वाले छात्रों की संख्या के बीच भारी अंतर को नजरअंदाज करता है, और डीयू की इसी पक्षपातपूर्ण दाखिला नीति पर सीयूईटी परीक्षा आधारित है। यह असल में विडंबना है कि जो लोग 12वीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, वे प्रमुख सरकारी वित्त पोषित उच्च शिक्षण संस्थानों से बाहर हैं। इसलिए, वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों को औपचारिक-मोड उच्च शिक्षा में प्रवेश करने में सक्षमबनाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।


साथ ही, सीयूईटी से सरकारी स्कूल के छात्रों को खासकर नुकसान होगा क्योंकि वो ज़्यादातर राज्य के शिक्षा बोर्ड में पढ़ते हैं। ज्ञात हो कि सीयूईटी एनसीईआरटी के सिलेबस पर आधारित है और सीयूईटी में ऐसे कई विषय नहीं दिये गए हैं, जो विभिन्न राज्य बोर्ड के छात्र पढ़ते हैं। ज़ाहिर है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने के लिए ऐसे छात्रों को कोचिंग लेनी पड़ेगी। सीयूईटी को इस ढांचागत संकट के समाधान के रूप में प्रस्तुत करना एक गलत कदम है, जो जरूर सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए महंगे निजी कोचिंग संस्थानों के प्रसार को प्रोत्साहित करेगा


केवाईएस केंद्र सरकार की कड़ी भर्त्सना करता है जिसने सीयूईटी जैसी भेदभावपूर्ण दाखिला नीति का निर्माण किया है। केवाईएस मांग करता है कि सभी सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में सीटों और सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाई जाए और उनमें ईवनिंग शिफ्ट भी शुरू की जाए। साथ ही, सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया में सरकारी स्कूल के छात्रों को 20% डेप्रिवेशन पॉइंट सुनिश्चित किया जाए। केवाईएस आने वाले दिनों में भेदभावपूर्ण शिक्षा नीति के खिलाफ अपने आंदोलन को केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय तक लेकर जाए

भीम कुमार

सदस्य

दिल्ली राज्य समिति

क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस)

संपर्क: 9899894575    

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