बेंगलुरु, कर्नाटक में कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहरों से ज्यादा ग्रामीण इलाके कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में हैं। इसके बावजूद गांव में शहरों के मुकाबले वैक्सीनेशन की स्थिति संतोषजनक नहीं है। राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के एक सर्वेक्षण पर नजर डालें तो पहली लहर में गांव में इतना प्रकोप नहीं था लेकिन दूसरी लहर से ग्रामीणों में कोरोना के मामले बढ़े। ग्रामीण इलाकों की स्थिति को देखते हुए गांवों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ गांवों में परीक्षण और टीकाकरण में वृद्धि की आवश्यकता है। राज्य में दूसरी लहर में लगभग 64 फीसदी गांव तक कोरोना का प्रकोप पहुंच गया है। गांवों में बीमारी का प्रकोप बढ़ने के साथ इन ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण की रफ्तार बहुत कम होना परिस्थितियां बिगड़ने का संकेत है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को मानें तो राज्य में ग्रामीण आबादी को 1.3 करोड़ खुराक दी जा सकी है। गांवों में अभी केवल 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को ही टीका दिया गया है और इनमें भी लगभग 60 प्रतिशत को दूसरी खुराक मिलना बाकी है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों के 45-60 साल की उम्र के लोगों को वैक्सीन देना चुनौतीभरा है। ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन की कमी के कारण गांवों में वैक्सीनेशन कार्य धीमा हो गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य में शनिवार को कोरोना संक्रमण के 14,304 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 464 लोगों की मौत हुई है। इसी एक दिन 29,271 लोगों ने कोरोना को मात दी है। राज्य में 2,98,299 सक्रिय मामले हैं। राज्यभर में कोरोना के अब तक 24,18,735 के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 29,554 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 22,90,861 लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं।
