![]() |
| कूप योजना उतरती धरातल पर तो संवर जाती धरहरा के किसानों की किस्मत |
मुंगेर : मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड के किसान आज भी भगवान भरोसे खेती करने को विवश है। समय पर बारिश नहीं होने से धरहरा प्रखंड के किसानों को पानी के अभाव में फसल सुख जाती है।सुखाड़ धरहरावासियो का कृषि ही मुख्य जीविकोपार्जन का साधन है। यहां के किसानों के खेतों तक सिंचाई पहुंचाने के लिए डकरा नाला सिंचाई परियोजना के साथ ही सतघरवा जलाशय योजना के क्रियान्वयन में करोड़ों रुपये व्यय किया गया। लेकिन यह परियोजना किसानों के लिए टांय-टांय फिस साबित हुआ । जब धरहरा प्रखंड में नक्सलियों का आतंक सिर चढ़कर बोल रही थी, तो 2013 में जिला प्रशासन ने यहां के किसानों के खेतों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से धरहरा प्रखंड के नक्सल प्रभावित बंगलवा, आजीमगंज, महगामा, ईटवा, माताडीह पंचायत में एकीकृत कार्य योजना(इंट्रीग्रेटेड एक्शन प्लान) के तहत प्रत्येक पंचायत में 100-100 कूप निर्माण की जिला प्रशासन के द्वारा योजना बनाई गई थी। ताकि, उनके माध्यम से किसान सिंचाई कर सकें। लेकिन, एक दर्जन कुओं के निर्माण के बाद यह योजना बंद कर दी गई। इसके कारण क्षेत्र की फसल उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। जिस किसानों के खेतों में कूप का निर्माण हुआ। वैसे किसान आज भी बारिश नहीं होने के बावजूद दो फसल उपजा रहे है। जिन किसानों कूप निर्माण की स्वीकृति मिलने के बावजूद कूप का निर्माण नहीं हो सका। वैसे किसान आज भी इस योजना के शीघ्र पूरी होने की बाट जोह रहे हैं।
क्यों बंद हुई योजना
इस योजना के क्रियान्वयन के लिए जिला में पर्याप्त राशि उपलब्ध था। लेकिन इस योजना में सीधे तौर पर मुखिया की जिम्मेवारी दिए जाने से राजनीतिक नेताओं की इस योजना में कुदृष्टि पड़ गयी। राजनीति दबाव के चलते न चाहते हुए भी जिला प्रशासन ने इस योजना को बंद कर दिया । यह योजना धरातल पर उतर जाती तो धरहरा के किसानों के किस्मत संवर जाती।
क्या कहते है किसान
किसान राजेश यादव , अजित सिंह ने बताया कि स्वीकृति के बावजूद भी कूप निर्माण नहीं हो सका है। सिंचाई की सुविधा नहीं रहने के कारण फसल की पैदावार अच्छी नहीं होती है।
किसान उमेश यादव, छोटू कुमार ने बताया कि कूप निर्माण की योजना किसान के हित में था। इसे फिर से चालू करने की जरूरत है।

