दो कमरों में प्लस टू स्कूल और दो कमरों में डिग्री कॉलेज! सीमांचल के बच्चों का भविष्य आखिर कैसे संवरेगा?महलगाँव और उदा की शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल; शिक्षा विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय हो
महलगाँव/उदा, अररिया।
सीमांचल में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के सरकारी दावों के बीच महलगाँव और उदा से सामने आ रही तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। महलगाँव में प्लस टू विद्यालय के लिए महज दो कमरे होने की बात सामने आ रही है। वहीं, उदा में स्थापित डिग्री कॉलेज में भी केवल दो कमरे उपलब्ध होने की जानकारी है। यदि स्थिति वास्तव में ऐसी है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि इतनी सीमित जगह में विद्यार्थियों की पढ़ाई, कक्षाओं का संचालन और उच्च शिक्षा की आवश्यकताएँ आखिर कैसे पूरी होंगी?
क्या सिर्फ भवन का नाम दे देने से शिक्षा का विकास हो जाता है?
प्लस टू विद्यालय में ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को विषयवार पढ़ाई, पर्याप्त कक्षाएँ, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की जरूरत होती है। इसी तरह डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएँ, विषयवार शिक्षण व्यवस्था, पुस्तकालय, आवश्यक शैक्षणिक संसाधन और पर्याप्त शिक्षकों की जरूरत होती है। ऐसे में यदि संस्थान केवल दो कमरों तक सीमित हैं, तो उनकी वास्तविक क्षमता और सुविधाओं की गंभीर समीक्षा जरूरी है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सवाल
आखिर शिक्षा विभाग ने इन संस्थानों के लिए कितने कमरों, शिक्षकों और अन्य सुविधाओं की स्वीकृति दी है? भवन निर्माण की योजना क्या थी? विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में आधारभूत संरचना उपलब्ध है या नहीं? क्या संबंधित अधिकारियों ने इन संस्थानों का निरीक्षण किया है? यदि कमरों की संख्या अपर्याप्त है, तो अतिरिक्त भवन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कब तक होगी?
इन सवालों का जवाब शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों को देना चाहिए। शिक्षा केवल चुनावी भाषणों और घोषणाओं का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।
आखिर कब जागेगी स्थानीय अवाम?
यह सवाल केवल सरकार और प्रशासन से नहीं, बल्कि स्थानीय समाज से भी है। जब बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य का मामला हो, तो क्या जनता की जिम्मेदारी केवल चुनाव के समय वोट देने तक सीमित रहनी चाहिए? क्या अभिभावकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर शिक्षा की बदहाली के खिलाफ आवाज नहीं उठानी चाहिए?
महलगाँव और उदा के विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक सुविधाएँ पाने का उतना ही अधिकार है, जितना देश के किसी अन्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को। सीमांचल के बच्चों को अधूरी व्यवस्था के भरोसे छोड़ देना न तो उचित है और न ही विकास के दावों के अनुरूप।
मिन्हाज अहमद क़ासमी का सवाल है कि जब दो कमरों में विद्यार्थियों की जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं, तो फिर ऐसी व्यवस्था से शिक्षा के विकास का सपना कैसे साकार होगा?
सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि दोनों संस्थानों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराकर कमरों, शिक्षकों, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अन्य सुविधाओं की कमी दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करें।
मांग स्पष्ट है: महलगाँव प्लस टू विद्यालय और उदा डिग्री कॉलेज को पर्याप्त भवन, शिक्षक और सभी जरूरी शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। सीमांचल के बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
