महलगांव हेल्थ सेंटर में डॉक्टर और पर्याप्त स्टाफ नहीं होने का आरोप, ग्रा
मीणों को इलाज के लिए भटकने की नौबत!
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर सवाल: ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टर, दवा, प्रसव और आपातकालीन उपचार की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करे सरकार
महालगांव/अररिया। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावों के बीच महलगांव स्थित हेल्थ सेंटर की स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र में नियमित डॉक्टर और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता नहीं है। आरोप है कि वहां सीमित संख्या में कर्मचारी ही मौजूद रहते हैं, जिनसे ग्रामीणों को अपेक्षित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र इसलिए बनाए जाते हैं, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का चक्कर न लगाना पड़े। लेकिन यदि स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, पर्याप्त स्टाफ और जरूरी दवाएं ही उपलब्ध न हों, तो ऐसे संस्थानों का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
दस रुपये देकर दवा लेने की मजबूरी, फिर भी पूरी दवा नहीं मिलने की शिकायत
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि महलगांव हेल्थ सेंटर में सीमित कर्मचारी मरीजों की परेशानी सुनकर दवा देते हैं और इसके लिए दस रुपये लिए जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार जरूरत के अनुसार पूरी दवा भी उपलब्ध नहीं हो पाती।
यदि मरीजों से किसी सेवा या दवा के लिए निर्धारित नियमों से अलग शुल्क लिया जा रहा है, तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मिलने वाली निःशुल्क सेवाओं और दवाओं की सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए, ताकि मरीजों को अपने अधिकारों की जानकारी रहे।
ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टर और स्थायी स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति जरूरी
महालगांव ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में संचालित सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। प्रत्येक केंद्र में जरूरत के अनुसार डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
मरीजों को सामान्य बीमारी के इलाज, जरूरी जांच और निर्धारित दवाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति, दवाओं का पर्याप्त स्टॉक और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से प्रभावी होनी चाहिए।
गर्भवती महिलाओं और प्रसव के लिए मिले बेहतर सुविधा
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गर्भवती महिलाओं की देखभाल और सुरक्षित प्रसव है। गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, आवश्यक दवाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता और प्रसव की सुविधा मिलनी चाहिए। जहां संस्थागत प्रसव की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां समय पर एम्बुलेंस, उचित रेफरल और नजदीकी सक्षम अस्पताल तक पहुंच की व्यवस्था होनी चाहिए।
विशेष रूप से गरीब परिवारों की महिलाओं को केवल संसाधनों की कमी के कारण निजी अस्पतालों पर निर्भर होने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।
गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन व्यवस्था हो
ग्रामीण अस्पतालों में आपातकालीन प्राथमिक उपचार, आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारी और रेफरल की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। गंभीर मरीजों को समय पर उचित चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जाए, ताकि इलाज में देरी से उनकी परेशानी न बढ़े।
स्वास्थ्य विभाग से जवाबदेही की मांग
महलगांव हेल्थ सेंटर में डॉक्टरों और कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति, स्वीकृत एवं रिक्त पदों, दवाओं की उपलब्धता, मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क और प्रसव संबंधी सुविधाओं की जांच कराई जानी चाहिए। जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं और कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई हो।
ग्रामीणों को केवल अस्पताल की इमारत नहीं, बल्कि इलाज की गारंटी चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महलगांव समेत सीमांचल के प्रत्येक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त डॉक्टर और कर्मचारी हों, जरूरी दवाएं उपलब्ध हों तथा गरीबों को सम्मानजनक और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिले। स्वास्थ्य सेवा कोई एहसान नहीं, बल्कि जनता की बुनियादी जरूरत है।
