शिक्षकों को लोकतंत्र में बयान देनेपर प्रतिबंध सर्वदा अनुचित, अशोक कुमार
पटना: भारत कभी विश्व गुरु था और आज विश्वगुरु भारत के शिक्षकों को लोकतंत्र में पेपर, मीडिया में वक्तव्य देने पर अपर आयुक्त केके पाठक द्वारा रोक लगाना कहीं से उचित नहीं प्रतीत होता दिख रहा है। यह तो भारतीय लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने जैसा प्रतीत हो रहा है। आखिर केके पाठक किस लोकतंत्र के पदाधिकारी हैं और ये बिहार के शिक्षा में अब तक क्या सुधार कर पाए है। बिहार की सड़ी गली शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए इन्हें अपर आयुक्त बनाया गया है जो सुधार के नाम पर नियमित आदेश पर आदेश जारी कर रहे हैं किन्तु बिहार की शिक्षा व्यवस्था सुधरी कहाँ है ये तो बतायें के० के० पाठक जी। केवल उपस्थिति बढ़ाने से, कमरा बनवाने से शिक्षा में सुधार संभव नहीं है। शिक्षा का जो प्रारूप पढ़ने पढ़ाने एवं मुल्यांकन का था जब तक सही ढंग से कियान्वयन नहीं होगा तब तक शिक्षा में सुधार की आशा बिहारवासियों को दिखावा स्वपन जैसा प्रतीत होते रहेगा। सरकार योजना पर योजना लागू करते रहे लोगों से वोट प्राप्त करते रहे इससे बिहार के शिक्षा में सुधार नहीं होगा। ऐसा मानना है सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज के ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार जी का।
