बिहार सरकार द्वारा जारी जाति गणना रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बिहार वैश्य महासभा द्वारा बैठक संपन्न




रिपोर्टर • राहुल कुमार पटना 


पटना: बिहार सरकार द्वारा जारी जाति गणना रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बिहार वैश्य महासभा के पदाधिकारीओ की एक आवश्यक बैठक बुलाई गई, जिसमें बिहार वैश्य समाज की सभी उपजातियां समेत अलग-अलग उपजातिया की गणना एवं सर्वे पर बिहार सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट पर गहन रूप से विचार किया गया।

बिहार वैश्य महासभा के अध्यक्ष डॉक्टर आनंद कुमार ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि चूंकि, वैश्य समाज के अधिकांश मतदाता भाजपा समर्थक होते हैं, जिसके कारण एक साजिश के तहत उनकी संख्या को कम करके दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में वैश्य समुदाय की 56 उपजाति निवास करती है, जिसका प्रतिशत 27% है, जबकि आंकड़ा देते हुए उन्होंने बताया कि पिछड़ा, अति पिछड़ा तथा सामान्य जाति में आने वाली वैश्य की समस्त जातियां की संख्या समग्र रूप से मात्र 18% दिखाया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछड़ा वर्ग में आने वाली बनिया जाति जिसमें करीब 20 वैश्य उप जातियां आती हैं,

उसकी संख्या मात्र 2.31% दिखाया गया है, जो सरासर गलत है। बिहार वैश्य महासभा के प्रधान महासचिव दिलीप कुमार गुप्ता ने कहा कि समस्त वैश्य उपजातियां को तीन श्रेणी यथा- सामान्य वैश्य, पिछड़ा वर्ग वैश्य तथा अत्यंत पिछड़ा वर्ग वैश्य के रूप में संयुक्त गणना होनी चाहिए थी।

श्री प्रिंस राजू बरनवाल एवं आलोक पोद्दार तथा डॉक्टर अमित केसरी ने कहा कि बिहार का कोई भी ऐसा विधानसभा क्षेत्र नहीं है, जहां वैश्य की आबादी 10-20% नहीं होती है। गणना रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है की वैश्य की आबादी बिहार में 3% से भी कम है।

Post a Comment

SEEMANCHAL EXPRESS

Previous Post Next Post