• दिल्ली के सफाई कर्मचारियों ने जंतर-मंतर पर आज सफाई मजदूर दिवस मनाया!
• भूप सिंह वाल्मीकि के शहादत दिवस पर शोषण, जाति-व्यवस्था और ठेका व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने का किया ऐलान!
दिल्ली के विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले सफाई कर्मचारियों ने आज सफाई कामगार यूनियन (एसकेयू) के बैनर तले भूप सिंह वाल्मीकि के शहादत दिवस के मौके पर सफाई मजदूर दिवस मनाया, जो 1957 में एक विरोध प्रदर्शन में पुलिस की गोली से शहीद हो गये थे। इस मौके पर जंतर-मंतर पर एक जनसभा का भी आयोजन किया गया। सफाई कर्मचारियों ने शहीद भूप सिंह वाल्मीकि की विरासत को याद करते हुए शोषण, जाति-व्यवस्था और ठेका व्यवस्था के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया। साथ, ही उन्होने अन्य कामगारों के साथ एकता बनाने और अपनी लड़ाई को उनके संघर्ष के साथ जोड़ने का भी संकल्प लिया।
ज्ञात हो कि ऐतिहासिक रूप से बहुसंख्यक सफाई कर्मचारी दलित समुदाय से आते रहे हैं। अमानवीय जाति-व्यवस्था के कारण, दलितों को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपमानजनक शारीरिक श्रम करने को मजबूर किया जाता था। आज भी दलित समुदाय से आने वाले सफाई कर्मियों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। आज भी, मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) जैसा अमानवीय कार्य करने के लिए दलित समुदाय मजबूर है जबकि इसे 1993 में गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है। देश में हर रोज़ सफाई कर्मचारी खतरनाक काम जैसे सीवर, गटर की सफाई करते हुए मौत का शिकार होते हैं। भारत सरकार चाँद पर यान पहुँचाने को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन शर्मनाक है कि आज भी लोग खतरनाक स्थिति में जीने और काम करने को मजबूर हैं।
ज्ञात हो कि दलितों को शिक्षा और समान अवसर से वंचित कर के उन्हें ऐतिहासिक तौर पर सामाजिक-आर्थिक हाशिए पर रखा गया है। आज भी दलित समुदाय में शिक्षा का स्तर बेहद कम है क्योंकि अलग-अलग सरकारों द्वारा निजीकरण के कारण देश में ऐसा सरकारी शिक्षा का ढर्रा नहीं बन पाया जिसमे पिछड़े समुदायों के छात्रों को पढ़ने का मौका मिल सके। ज्ञात हो कि दलितों के खिलाफ हिंसक अपराध जैसे लिंचिंग, हत्याएं और बलात्कार होना एक आम बात हो गयी है। नेशनल क्राइम्स रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, दलितों के खिलाफ अपराधों में 2020 में 9.4% की वृद्धि दर्ज की गई। शासन द्वारा दबंग जातियों के अपराधियों को बचाने के हर संभव प्रयास किए जाते हैं और अधिकतर मामलों में दलित समुदाय को न्याय नहीं मिलता है।
सभी सरकारें और नेता दलितों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखने वाले दिनों को अपनी वोट की राजनीति बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, मगर वे बहुसंख्यक दलितों को जातिवाद के पुश्तैनी, शोषणकारी श्रम के चक्र से बाहर निकालने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
आज की जनसभा का शपथ लेकर अंत किया गया जिसमें मौजूद लोगों ने जातिवाद, ब्राह्मणवाद, सामाजिक अन्याय, मैनुअल स्कैवेंजिंग और सफाई के काम में शोषणकारी ठेका प्रथा के खिलाफ आंदोलन तेज करने का प्रण लिया। एसकेयू अपने जन-अभियान को दिल्ली राज्य के कोने-कोने तक ले जाने और जातिमुक्त समाज बनाने के लिए लगातार संघर्ष करने का प्रण लेता है।

