दिल्ली जल बोर्ड केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा: बिधूड़ी

दिल्ली जल बोर्ड केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा: बिधूड़ी

पांच सालों में जल बोर्ड का घाटा 26 हजार करोड़ से हो गया 70 हजार करोड़

जल बोर्ड में यमुना की सफाई और दूसरे कामों के फंड का नहीं है कोई हिसाब



 

 

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि केजरीवाल सरकार के निकम्मेपन के कारण दिल्ली जल बोर्ड का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच सालों में यह घाटा 170 फीसदी बढ़कर 70 हजार करोड़ को पार कर गया है। जल बोर्ड के पास खर्चे का कोई हिसाब-किताब नहीं है। दिल्ली सरकार हर साल जल बोर्ड को कर्मचारियों की सैलरी के लिए 900 करोड़ रुपया दे रही है। यमुना की सफाई और संसाधन बढ़ाने के लिए दिए गए फंड को भी बिना मंजूरी के ही दूसरी मदों में खर्च कर दिया गया है। बिधूड़ी ने जल बार्ड के पिछले 8 साल के कामकाज की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।

 

बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली सरकार के ही वित्त विभाग ने दिल्ली जल बोर्ड के कामकाज पर स्वयं रिपोर्ट मांगी है और वित्त विभाग ने जो सवाल उठाए हैंवे बड़े चौंकाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2018 तक दिल्ली जल बोर्ड का घाटा 26,268.89 करोड़ रुपए था लेकिन अब यह पांच साल में ही 70,000 करोड़ को भी पार कर गया है। दिल्ली जल बोर्ड के रिकॉर्ड में पानी की सप्लाई भी बढ़ रही है और उपभोक्ता भी लेकिन रेवेन्यू घट रहा है जोकि चौंकाने वाला है। 2016-17 में 1615.83 करोड़ रुपए का रेवेन्यू प्राप्त हुआ था जो 2018-19 में बढ़कर 1,819.60 हो गया लेकिन उसके बाद से लगातार गिरावट हो रही है।

 

 2021-22 में दिल्ली जल बोर्ड को 1530.60 करोड़ रुपए का रेवेन्यू प्राप्त हुआ है।

 

2013-14 में दिल्ली जल बोर्ड में करीब 600 करोड़ रुपए सरप्लस थेयह बात मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी स्वीकार की थी।

यह माना जाता है कि जल बोर्ड को जो रेवेन्यू प्राप्त होता हैउसी से उसके वेतन आदि का खर्चा निकलना चाहिए लेकिन अब हालत यह है कि हर साल दिल्ली सरकार 900 करोड़ रुपए दिल्ली जल बोर्ड को वेतन वगैरह के लिए दे रही है। यही नहींदिल्ली जल बोर्ड को दिल्ली सरकार ने 12,712 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट्स के लिए दिए लेकिन इस राशि का कोई हिसाब नहीं है। इसमें से बड़ी राशि दूसरे कामों के लिए खर्च कर दी गई है और उसकी कोई मंजूरी नहीं ली गई। इस साल मई में दिल्ली जल बोर्ड को यमुना की सफाई तथा अन्य कार्यों के लिए 1557 करोड़ रुपए दिए गए लेकिन पता चला है कि 750 करोड़ रुपए का भुगतान पिछले बकाये के रूप में कर दिया गया और उसकी भी कोई मंजूरी नहीं ली गई।

 

बिधूड़ी ने कहा है कि इस समय दिल्ली जल बोर्ड दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है और जल बोर्ड के कामकाज की जांच होनी बहुत जरूरी है। जांच में कई बड़े रहस्यों से पर्दा उठ चुका है। 20 करोड़ रुपए के बिल घोटाले की तो पहले ही जांच चल रही है।

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