
योगेंद्र पासवान दलितों के एकीकरण पर बातें की. योगेंद्र पासवान यूनियन बैंक से रिटायर ने कहा की भारत में दलितों की एकीकरण की बात झूठी है क्योंकि हर राज्य का गली अलग-अलग जातियों में बटा है कहीं अंबेडकर के मानने वाले हैं तो कहीं संतकबीर को मानने वाले हैं उन्होंने कहा की हमारे बिहार राज्य में 22 जातियां है मगर सब अलग-अलग धर्म से जुड़ा हुआ है अंबेडकर के नाम पर अनेकों संगठन बिहार में चल रही है मगर अंबेडकर का मिशन को गांव गांव तक नहीं पहुंचाया जाता है जिससे हमारे गांव ग्रामीण में रहने वाले लोग कुछ समझ नहीं पाते यदि हम लोग एकजुटता के साथ दिन रिता के साथ यह संकल्प लेकर हम लोगों को अपने मिशन अपने विचारों और बाबा साहेब का जो सपना था जब तक हम लोग गांव की ओर मूव नहीं करेंगे तो हमारा समाज जाग नहीं पाएगा. शशशयोगेंद्र पासवान ने कहा कि हमने कई राज्यों का दौरा कियाजैसे उत्तर प्रदेश संत रविदास लोग मानते हैं महाराष्ट्र में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को मानते हैं इसी प्रकार अन्य राज्यों में अलग-अलग तरह के दलित अपने खेमे में वाटे हुए हैं हमें ऐसे बैठे हुए समाज को एकीकरण करने के लिए हर व्यक्ति को दायित्व होता है कि समाज को जागरूक करने के लिए हम सब मिलकर गांव ग्रामीण में अपने एकता के लिए प्रयास करना चाहिए