शिक्षा माफिया की सरकार में भागीदारी औऱ दबदबा का परिणाम है ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था, विजय कुमार सिन्हा



निजी विद्यालयों को बंद करने के वजाय इन्हें सुधारने हेतु कार्रवाई क्यों नहीं?----विजय कुमार सिन्हा

संवाददाता • राहुल कुमार 


निजी विद्यालय बंद करने का निर्णय चरवाहा विद्यालय पुनः शुरू करने की मंशा से प्रेरित---विजय कुमार सिन्हा

अभावग्रस्त सरकारी विद्यालय के कारण ही निजी विद्यालय लोगों की पहली पसंद,जिम्मेबार कौन?

शिक्षा माफिया की सरकार में भागीदारी औऱ दबदबा का परिणाम है ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था,


निजी विद्यालय ही बचा रहे हैं राज्य की शिक्षा व्यवस्था की इज्जत।

पटना 11 जून 2023

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा ने सरकार द्वारा राज्य के 2005 निजी विद्यालय की मान्यता रद्द करने की दिशा में उठाये जा रहे कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि निजी विद्यालय ही राज्य की शिक्षा व्यवस्था की इज्ज़त बचा रहे हैं।इन्हें बंद करने के बजाय सुधारने हेतु सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?

श्री सिन्हा ने कहा कि नीतीश सरकार की यह नियति बन गयी है कि स्वयं शुरू किये गए योजनाओं को ध्वस्त किया जा रहा है।पहले बिना सोचे समझे लेन देन कर बड़ी संख्या में निजी विद्यालयों को चलाने हेतु अनुमति दी गई।अब जब ये विद्यालय राज्य की शिक्षा अबसंरचना की रीढ़ बन गए हैं इन्हें बंद किया जा रहा है।राज्य की जनता जानती है कि किस प्रकार घर घर यहाँ तक की मंदिर मस्जिद के सामने2005 के बाद शराब की दुकान खुलबाई गई और राज्य को मदिरालय बना दिया गया।फिर अचानक शराबबंदी लागू कर राज्य को ज़हरीली शराब और शराब तस्करी का अड्डा बना दिया गया।

श्री सिन्हा ने कहा कि सरकार का यह प्रयास एक बार फिर से चरबाहा विद्यालय शुरू करने की मंशा से प्रेरित है।आज शिक्षा विभाग चरबाहा विद्यालय के जनक के दल के पास है।लोगों ने देखा है कि किस प्रकार 1990 से 2005 के वीच राज्य की शिक्षा व्यवस्था रसातल में चली गई।एन डी ए की सरकार2005 में बनी और शिक्षा को बदहाली से निकालने का काम शुरू हुआ।

श्री सिन्हा ने कहा कि सरकारी विद्यालयों की स्थिति बेहद नाजुक है।विद्यालय भवन, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी, प्रयोगशाला औऱ अन्य आबश्यक अबसंरचना के अभाव के कारण सरकारी विद्यालयों में अभिभाबक बच्चों का दाखिला नहीं करा रहे हैं।सरकारी पदाधिकारी एवं कर्मचारी भी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही भेज रहे हैं।ऎसी स्थिति में निजी विद्यालयों को बंद करने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।लोगों में चर्चा है कि इसी बहाने फिर से शिक्षा विभाग अपनी वसूली तंत्र को सक्रिय कर रहा है।सर्वविदित है कि शिक्षा माफियाओं की सरकार में भागीदारी है औऱ इनका शिक्षा तंत्र पर पूरा दबदबा है।राज्य की ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था इसका ही परिणाम है।

श्री सिन्हा ने कहा कि सरकार को पुनः विचार करना चाहिए और निजी विद्यालयों को समय देकर उनसे वांछित कागजात प्राप्त करना चाहिए।सुधार हेतु यथा आबश्यक  दंडात्मक कार्रवाई से भी सरकार को परहेज नहीं करना चाहिए।यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो राज्य में पठन पाठन के माहौल को खराब होने से कोई नहीं बचा सकता है।बिना पढ़ाई सरकारी विद्यालयों में परीक्षा हो रही है।इसकी जाँच कब होगी?

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