रिपोर्टर • अशोक कुमार
पटना। शिक्षा विभाग के पूर्व में किए गए कारनामे के साथ हर दिन हो रहा है कुछ ना कुछ नए नए खुलासे हो रहे हैं। दैनिक जागरण के पृष्ठ 3 (तीन) पर छपे समाचार इस बात के उदाहरण है कि बिहार में शिक्षा के नाम पर आखिर हो क्या रहा है सुशासन बाबू माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी लाख घोषणा करते हैं कि बिहार का शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त है किन्तु यह असली सच नहीं है। सच्चाई तो यह है कि बच्चों को जो निःशुल्क किताब वितरण किया जाता है वह भी समय पर नहीं दिया जाता है बाद में यह किताब कबाड़ खाने में बेचा जाता है। यहाँ के प्रखंड संसाधन पदाधिकारी के मिली भगत से ही ऐसा होता है। प्रखंड शिक्षा अधिकारी कहीं भी समय पर किताब वितरित नहीं करवाते है। शिक्षा परियोजना के टेस्ट संभाग विभाग भी बच्चों के लिए किताब समय पर छापकर कर नहीं भेजता। किंतु सारा रुपया समय पर निकाल लेता है। इसी लिए शिक्षा विभाग को सफेद हाथी कहा जाता है। यह घटना सरकार के नजर में आने के बाद भी एक दूसरे पर दोषारोपण करने में लोग लगे हुए हैं यद्यपि सभी पदाधिकारी दोषी हैं। शिक्षा विभाग में मिड-डे वस्र एवं छात्रवृति या जितने भी सरकारी योजना है सभी योजना के पैसे का केवल यहाँ का बन्दर बांट होता है अगर बिहार में सभी विधालयों का औचक निरीक्षण, एवं छात्र छात्राओं के सही स्थिति आंकलन ु। हो तो एक भी प्रधानाध्यापक नहीं बच सकते हैं
