पटना/सोनपुर/ सारण : बाबा हरिहर नाथ मंदिर पहुंचे सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज के उप ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार ने लिया बाबा का आशीर्वाद । स्थानीय रिपोर्टर श्री राहुल कुमार ने बताया कि सीमांचल एक्सप्रेस उप ब्यूरो चीफ बिहार श्री अशोक कुमार जी ने बाबा हरिहर नाथ मंदिर सोनपुर में जाकर पूजा अर्चना कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री अशोक कुमार ने वहां के मंदिर के संदर्भ में जानकारी जुटाए और बताएं कि यह मंदिर न्यास परिषद से निबंधित एवं सहायता प्राप्त है जहां मंदिर के अध्यक्ष श्री सुशील चंद्र शास्त्री जी से बातचीत के क्रम में वहां के विधि व्यवस्था की जानकारी प्राप्त किए अध्यक्ष श्री सुशील चंद्र शास्त्री जी ने उप ब्यूरो चीफ श्री अशोक कुमार जी को मान सम्मान देते हुए विस्तार पूर्वक मंदिर के बारे में जानकारी दिया, तथा कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर पुनः मंदिर परिसर में आने को आमंत्रित किए इसके लिए ब्यूरो चीफ ने सहृदय धन्यवाद दिया तथा वहां होने वाले धार्मिक गतिविधि के संदर्भ में सूचना प्रदान करने का आग्रह किया ताकि मंदिर का नाम सारे देश प्रदेश में जाए ।
• धार्मिक मान्यताओं के अनुसार
"हरिहर नाथ मंदिर" की विशेषता
देश में ऐसे कई मंदिर व धार्मिक स्थल हैं जो देशवासियों के लिए आस्था का केंद्र तो बने ही हुए हैं। परंतु साथ ही ये आश्चर्य का विषय बना हुआ है। ऐसा ही एक मंदिर स्थित है हरिहर नाथ मंदिर। बता दें ये मंदिर बिहार की राजधानी पटना से 5 कि.मी दूर उत्तर सारण में गंगा और गंडक के संगम पर स्थित 'सोनपुर' नामक कस्बे को प्राचीन काल में हरिहर क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, जो आज देश के चार धर्म महा क्षेत्रों में से एक कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषियों और मुनियों द्वारा इसे प्रयाग और गया से भी श्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस संगम की धारा में स्नान करने से हज़ारों वर्ष के पाप कट जाते हैं।
इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां एक विशाल मेला लगता है जो मवेशियों के लिए एशिया का सबसे बड़ा मेला समझा जाता है। यह विश्व का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है जो कुल 15 दिनों तक चलता है। हालांकि बदलते परिवेश में इस मेले में भी बहुत बदलाव आया है। इस मेले में खरीददारी करने लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं
सोनपुर में स्थित बाबा हरिहर नाथ मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां श्री हरि विष्णु के दो भक्त हाथी (गज) और मगरमच्छ (ग्राह) के रूप में धरती पर उत्पन्न हुए। एक बार जब कोनहारा घाट पर गज पानी पीने गया तो उसे ग्राह ने अपने मुंह में जकड़ लिया। जिसके बाद दोनों में युद्ध शुरू हो गया जो कई दिनों तक चलता रहा।
इस दौरान गज जब कमज़ोर पड़ने लगा तो उसने भगवान विष्णु के आगे प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुदर्शन चक्र चलाकर दोनों के युद्ध को खत्म करवाया।
पौराणिक किवंदतियों के अनुसार क्योंकि इसी स्थान पर गज और ग्राह का युद्ध हुआ था इसलिए यहां पशु की खरीददारी को शुभ माना जाता है। इसी स्थान पर हरि (विष्णु) और हर (शिव) का मंदिर है, जिसे बाबा हरिहर नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।
कुछ लोगों की मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण श्री राम ने सीता स्वयंवर में जाते समय किया था। तो वहीं अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में हिंदू धर्म के दो संप्रदाय शैव व वैष्णव में अक्सर विवाद हुआ करता था, जिससे समाज में संघर्ष एवं तनाव की स्थिति बनी रहती थी। कालांतर में दोनों संप्रदाय के प्रबुद्ध जनों के प्रयास से इस स्थल पर एक सम्मेलन आयोजित कर समझौता कराया गया और यहां हरि (विष्णु) एवं हर (शंकर) की संयुक्त स्थापना की गई, जिसे हरिहर क्षेत्र कहा गया।