गुर्जर-प्रतिहार राजवंश की शाखा है समथर रियासत, 1857 की क्रांति और मुगलों से लड़ाई में रहा अग्रणी, नंदकिशोर गुर्जर






लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने झांसी पहुंचकर समथर नरेश महाराजा रंजीत सिंह जूदेव (गुर्जर) को दी श्रद्धांजलि, कहा देश की आज़ादी में समथर रियासत का महत्वपूर्ण योगदान, मुगलों और अंग्रेजों के छुड़ाए थे छक्के

सोमवार को लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने झांसी पहुंचकर पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं समथर नरेश महाराजा रंजीत सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि अर्पित कर,परिजनों  को ढांढस बंधाया। इस दौरान लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने समथर नरेश के  दामाद एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार जयप्रताप सिंह, समथर नरेश के भांजे और भदरी रियासत के कुँवर, जनसत्ता पार्टी लोकतांत्रिक के अध्यक्ष एवं कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह, झालावाड़ से भाजपा से सांसद कुंवर दुष्यंत सिंह आदि से भेंट कर, शोक संवेदना व्यक्त की। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने समरथ नरेश केगुर्जर-प्रतिहार राजवंश की शाखा है समथर रियासत, 1857 की क्रांति और मुगलों से लड़ाई में रहा अग्रणी बीमारी के दौरान भी भेंट कर, कुशलक्षेम लिया था।

• गुर्जर-प्रतिहार राजवंश की शाखा है समथर रियासत, 1857 की क्रांति और मुगलों से लड़ाई में रहा अग्रणी

लोनी विधायक ने बताया कि समथर गुर्जर-प्रतिहार राजवंश की सबसे मजबूत शाखाओं में से गिनी जाती है जिसका 5 मंजिला ऐतिहासिक और रहस्यमय किला अंग्रेज और मुगल नहीं भेद पाए। समथर, 17वीं और 18वीं शताब्दी से महान गुर्जर योद्धाओं की स्वतंत्र राजधानी रही है। 1857 की क्रांति में युध्द के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ जाकर रानी लक्ष्मीबाई और उनकी सेना का मदद करना हो या फिर मुगल शासन के दौरान भी समथर को स्वतंत्र स्टेट बनाये रखना, समथर रियासत की विशेषताओं में से एक है। आज समथर नरेश महाराजा रंजीत सिंह जूदेव जी के निधन से पूरे बुंदेलखंड समेत देशभर में उनके चाहने वालों में दुख की लहर है। आदरणीय जूदेव जी का व्यक्तित्व विराट और अनुकरणीय है भारतीय राजनीति में भी उनका नाम आदर से लिया जाता है उन्होंने गृह मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर अपना राजनीतिक जीवन व्यतीत किया।



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