संजय कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में तीन सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं.
मैनपुरी उपचुनाव में जीत के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अब नई रणनीति के साथ काम कर रहे हैं. इसी वजह से शिवपाल यादव की पार्टी का सपा में विलय कराया गया. वहीं अब चर्चा है कि अखिलेश यादव दिल्ली की राजनीति करना चाहते हैं. हालांकि
इस चर्चा के पीछ उनके बयानों को वजह माना जा रहा है.
दरअसल, यूपी में उपचुनाव में प्रचार के दौरान अखिलेश यादव ने एक बयान दिया था. तब उन्होंने अपने बयान में कहा था, "चुनाव के समय घर बैठ कर क्या करेंगे लड़ेंगे चुनाव, जहां से लड़ा था पहला चुनाव वहीं से लडूंगा. वैसे भी पार्टी है तय करेगी कि चुनाव में क्या करना है. हमारी चुनावी रणनीति पार्टी की सहमति के आधार पर बनेगी." खास बात ये है कि पहला लोकसभा चुनाव अखिलेश यादव ने कन्नौज से ही लड़ा था."
वहीं इसके पीछे एक और वजह है.
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद सपा में दिल्ली की राजनीति को संभालने वाला अब कोई नहीं दिख रहा है. ऐसे में शिवपाल यादव के पार्टी में आने के बाद अब विधानसभा में शिवपाल यादव को सपा का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है. एक चर्चा ऐसी भी है कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष भी बनाया जा सकता है. हालांकि अभी तक इसकी कोई अधिकारिक पुष्टी पार्टी द्वारा नहीं की गई है.
इसके अलावा अगर अखिलेश यादव के बयान पर गौर करें तो स्पष्ट है कि सपा प्रमुख 2024 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज से लड़ना चाहते हैं. जिससे संसद में सपा का नेतृत्व कर सकें. यहां खास बात ये है कि सपा प्रमुख पहले कन्नौज से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं. ऐसे में अखिलेश यादव दिल्ली में पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं. जबकि राज्य में कमान शिवपाल सिंह यादव को दी जा सकती है. बीते उपचुनाव के परिणामों ने शिवपाल यादव के नेतृत्व को और मजबूत किया है.
