नैतिक रूप से मोरबी त्रासदी पर प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री को त्याग पत्र देना चाहिए। आलेख - वरिष्ट सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार



नैतिक रूप से मोरबी त्रासदी पर प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री को त्याग पत्र देना चाहिए। आलेख - वरिष्ट सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार- पटना 


गुजरात के मोरवी त्रासदी भयंकर घटना है जो दर्शाता है कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री अमित शाह जी के राज्य की अकल्पनीय घटना है। इस घटना मैं कितने माँ की गोद सुनी हो गई कितने माताओं की माँगों की सिन्दुर उजड़ गया और कितने बच्चे माता-पिता की छांव से दूर हो गये। इस घटना पर प्रधानमंत्री के भावुक होकर 2,00000
दो लाख का मुआवजा देकर लोगों को मरहम लगाना नैतिक रूप से कहीं से भी उचित' प्रतीत नहीं होता है। भाजपा की सरकार अपने आप को अपना मुँह मिया मिट्टू की कहावत चरितार्थ करने में लगी हुई है। देश दुनियाँ के लोग हैरान हैं कि पुल का ठीका उसे कम्पनी को दिया जाता है, जो पुल बनाने का क ख ग भी नहीं जानता है यह कम्पनी बल्व बनाने की कम्पनी है। आखिर इस कम्पनी को पुल बनाने का ठीका दिया कैसे गया और किसके शासन काल इतना बड़ा जनता के साथ धोखा किया गया ये सारी बात की जानकारी तह तक होना चाहिए। जो लोग इस धरती से विदा हो गये इसका जिम्मेवारी कोई भी लेने वाला नहीं है। जो कम्पनी का मालिक है वह बड़ा आदमी है वह व्यक्ति निश्चित रूप से भाजपाई ही है और भाजपा को बड़ी रकम चन्दा देने वालों में से हैं इसी के चालते वह छिपा' है पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है, धिक्कार है ऐसे पुलिस प्रशासन को जो इतना बड़ा घटना का जिम्मेदार है उसे नहीं पकड़ का कर्मचारीयों को पकड़कर अपना जिम्मेदारी निभा रहा है। मैं मांग करता हूँ कि नैतिक रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही व्यक्तियों को जिम्मेदारी लेते हुए इस घटना के बाद इस्तीफा दे देना चाहिए।

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