पटना रिपोर्टर, प्रदीप कुमार : जनता दल यूनाइटेड के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह आरसीपी सिंह का जदयू पार्टी से इस्तीफा देना पार्टी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात है यह सत्य है कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आज कुछ चहेते चाटू कारों के घेरे में है जो ऐसी निंदनीय निर्णय ले रहे हैं जो आगे भी चल कर जदयू पार्टी का बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला सिद्ध होने जा रहा है। आरसीपी सिंह पर संपत्ति बटोरने के नाम पर बड़ा हमला बोला गया है किंतु पार्टी लाइन को देखें, तो ऐसा मुख्यमंत्री के चहेते मिस्टर श्रवण कुमार जो ग्रामीण मंत्री हैं क्या इनसे कभी कम संपत्ति बटोरे हैं नहीं लेकिन इन पर कोई कार्यवाही नहीं संभव है कारण यह है कि यह मुख्यमंत्री के चहेते हैं यह तो निश्चय है कि पार्टी का लुटिया डबेगा ही क्योंकि जिन चाटुकारों के घेरे में मुख्यमंत्री जी है जिनके इशारों पर मनगढ़ंत फैसला ले रहे हैं। जो मुख्य कार्यकर्ताओं नजरअंदाज कर धनवान लोगों को आश्रय देना, दूसरे पार्टी से आए लोगों को तुरंत टिकट देना, पुराने कार्यकर्ता को साइड लगा देना इस पार्टी की फितरत हो गया है। बहुत से ऐसे कार्यकर्ता हैं जो समता पार्टी गठन के समय से कार्य करते रहे। पार्टी द्वारा इनको सही सम्मान नहीं दिया गया। केवल नीति की लड़ाई नीतीश जी की अगुवाई घर घर जाकर पार्टी फोरम की नीति की दुहाई जैसे कार्य में लगे रहे। लेकिन ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी में पूछने वाला कोई नहीं पहचानने वाला कोई नहीं है स्वयं माननीय नीतीश कुमार जी समता पार्टी के गठन के समय कुछ नहीं थे किंतु जॉर्ज फर्नांडिस शरद यादव डॉक्टर अरुण शर्मा जैसे लोगों के नेतृत्व में आगे बढ़ने का अवसर मिला जहां रामविलास पासवान जी का साथ मिला तब जाकर बिहार में नीतीश की सरकार बनी लेकिन यह सारे समय को भुलाकर, लल्लन सिंह जैसे डपोरशंखी को राष्ट्रीय अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जाति का वोट साधने हेतु है कदम उठा रहे हैं डॉक्टर आरसीपी सिंह जी यथासंभव पार्टी फोरम को बढ़ाया लेकिन इनके कुछ प्रतिद्वंदी ने इनका बेड़ा गर्क कर दिया। नीतीश जी के जितने निकट के आदमी आरसीपी सिंह जी थे शायद ही कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री के इतने निकट रहे होंगे यहां तक कहा जा रहा था आगे की जिम्मेवारी भी आरसीपी सिंह को मिलने वाला है जदयू के प्रवक्ता के अनुसार जीरो वायलेंस की नीति पर आधारित जदयू का शासन-प्रशासन है यद्यपि यह 100% असत्य है आज की राजनीति वातावरण में यह संभव नहीं है राजनीतिक में झूठ का बोलबाला पैसा कमाना सभी का ध्येय हो गया है सच तो यह है कि वर्तमान समय में राजनीतिक नहीं बल्कि रणनीति किया जाता है प्रवक्ताओं को तो केवल बोलना होता है सच्चाई से तो मतलब है ही नहीं। कहां कौन कार्यकर्ता पार्टी के नीति से आहत है ना जाने कितने वक्तव्य नितीश कुमार जी द्वारा दिया गया जो सत्य से परे होकर रह गया, किंतु बात वही की वही रह गया सौ बात की एक बात सबको चाहिए कुर्सी कुर्सी के बिना कोई नहीं रह सकता ? आलेख अशोक कुमार वरीय कार्यकर्ता समता पार्टी से जदयू तक, पटना बिहार
