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कवि : श्री अशोक मिश्र !! प्रधानाचार्य इंटर कालेज प्रताप गंज, जौनपुर उत्तर प्रदेश !! |
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मनु ने कब रोका था तुमको
सुंदर नूतन रचो विधान,
वर्ण व्यवस्था, जाति धर्म का
खोज न पाए सफल निदान।
एक देश में कुछ विवर्णऔर
कुछ सवर्ण यह किसकी सोच,
मिला तुम्हे था अनुपम अवसर,
क्यों चूके, कैसा संकोच।
बड़े चतुर तुम चित्रकार पर
रच डाली खंडित प्रतिमा,
देश विकल है, दहक रहा है
छीज रही उसकी महिमा।
है अतीत कुछ दागदार तो
उसे धवल, सुंदर गढ़ते,
कुछ अभिनव सोपान बनाते
और प्रगति के पथ बढ़ते।
कुछ टोना–टोटका लेआए
महामंत्र का नाम दिया,
बढ़ी विषमता की ही खाई
कैसा अनुपम काम किया।
प्रतिभाओं का निर्वासन और
हीन योग्यता का सम्मान,
भ्रष्ट जनों का राज्यारोहण
कुटिल जनों का जय–जय गान।
मनु को सदा कोसने वाले
हैं माया के दलदल में,
बस कुर्सी की जरा झलक पर
बदले निष्ठा पल–पल में।
अशोक मिश्र, प्रधानाचार्य
इंटर कालेज प्रताप गंज, जौनपुर
उत्तर प्रदेश।