• केजरीवाल सरकार द्वारा नई आबकारी नीति को लागू करने के अहम फैसलों के समय एक्साईज़ कमीश्नरों की लगातार छुट्टी किसके ईशारे पर हो रही थी, इसकी भी जांच हो।- चौ0 अनिल कुमार
• क्लास रुम निर्माण घोटाले की रिपोर्ट सीवीसी रिपोर्ट को विजिलेंस विभाग द्वारा ढ़ाई वर्षों से दबाकर रखना मनीष सिसोदिया के गले का एक और फंदा साबित होगा। - चौ0 अनिल कुमार
नई दिल्ली, - दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि दिल्ली सरकार नई शराब नीति बनाने से लेकर 17 नवंबर, 2021 को लागू होने तक जिस एक्साइज कमिश्नर ने सरकार की शराब नीति पर आपत्ति जताई, उन्हें केजरीवाल सरकार ने भाजपा के साथ मिलकर तुरंत स्थानांतरित कर दिया, जिसका खुलासा शराब घोटाले के उजागर होने के बाद उपराज्यपाल द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश के बाद हुआ। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के इच्छापूर्ति के लिए मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में 4 सितम्बर, 2020 को नई आबकारी नीति को बनाने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी। कैबिनेट द्वारा ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा जब 22 मार्च 2021 को रिपोर्ट की मंजूरी दी गई उस समय एक्साइज कमिश्नर पद खाली था, जो जांच का विषय है।
चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि यह भी जांच का विषय है कि शराब घोटाले को अंजाम देने के लिए शराब नीति बनाने के समय जब 13 अक्टूबर 2020 को एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट आई तब मौजूदा एक्साइज कमिश्नर की 31 अक्टूबर, को छुट्टी कर दी गई। यही प्रक्रिया 5 फरवरी, 2021 को मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स के गठन के समय दोहराई गई, उस दौरान एक्साईज कमिशनर राहुल सिंह को 03 फरवरी, 2021 को पदमुक्त कर दिया गया, जिनका कार्यकाल सिर्फ 3 महीने का रहा, उसके बाद नए कमिश्नर संजय गोयल का कार्यकाल सिर्फ एक महीने का था। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि शराब नीति को बनाने के दौरान लगातार एक्साईज आयुक्तों को कौन पदमुक्त करवा रहा था, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि केजरीवाल सरकार द्वारा लागू की गई नई शराब नीति के वक्त एक्साईज़ कमीश्नर अरवा गोपी कृष्णा सहित उपायुक्त अरविन्द कुमार तिवारी को इतनी देरी गृहमंत्रालय द्वारा सस्पेंड क्यों किया गया, जबकि मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में गोपी कृष्णा ने कमीश्नर पद पर रहते भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए नई शराब नीति को लागू किया था। उन्हांने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने अपनी पार्टी की आर्थिक जरुरतों को पूरा करने दिल्ली सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार को अंजाम दिए है, जिनका खुलासा एक-एक करके दिल्ली की जनता के सामने आ रहा है।
चौ0 अनिल कुमार ने कहा कि केजरीवाल सरकार के शराब घोटाला के बाद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कमरों के निर्माण करने में अनियमितताओं के मामले को केन्द्रीय सर्तकता आयोग की जांच रिपोर्ट पर विजिलेंस विभाग द्वारा ढाई वर्षों तक कार्यवाही क्यों नही की गई, इस मामले उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार में बढ़ती भ्रष्टाचार की गतिविधियों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। बेहतरीन शिक्षा मॉडल की आड़ में स्कूलों में रिनोवेशन के काम में करोड़ो रुपये का घोटाला हुआ है तथा टेंडर प्रक्रिया में कमरों के निर्माण की लागत में 500 करोड़ की बढ़ोतरी की गई जबकि तय वर्क से कम संख्या में कमरों का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि क्या मनीष सिसोदिया के आदेश पर तो सीवीसी की जांच रिपोर्ट को विजिलेंस विभाग ने ढाई वर्षों से दबाकर रखा गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
