Repoted by, Chandan*महिला एवं बाल विकास मंत्री कैलाश गहलोत ने पूरक पोषाहार कार्यक्रम के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों में पका हुआ भोजन व टेक-होम राशन की आपूर्ति हेतु ईओआई आमंत्रित करने को दी स्वीकृति*महिला एवं बाल विकास विभाग ने दिल्ली के सभी 11 जिलों के आंगनबाडी केंद्रों पर पूरक पोषाहार की आपूर्ति के लिए ईओआई आमंत्रित किया*सभी स्वयं सहायता समूह तथा स्थानीय महिलाओं की भागीदारी के साथ बड़ी रसोई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने और संचालित करने के लिए संसाधन रखने वाले सभी संगठन इसमें भाग ले सकते हैं*दिल्ली में फिलहाल 95 परियोजनाओं के तहत 10,897 आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं*वर्तमान में, लगभग 9.5 लाख पंजीकृत लाभार्थी महिलाएं और बच्चे दिल्ली में पूरक पोषण के हकदार हैं*हमारा मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर गर्म भोजन पकाने और संसाधित टेक-होम राशन, गुणवत्ता परीक्षण और निर्धारित वितरण के लिए एक आधुनिक व्यवस्था का निर्माण करना है ताकि इसका लाभ सभी लाभार्थियों को साल में कम से कम 300 दिन निर्बाध रूप से मिल सके-कैलाश गहलोत
नई दिल्ली, 22 जुलाई 2022 दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री श्री कैलाश गहलोत ने दिल्ली के सभी 11 जिलों के आंगनवाड़ी केंद्रों पर महिलाओं और बच्चों को पूरक पोषाहार कार्यक्रम के अंतर्गत पका हुआ भोजन व टेक-होम राशन देने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित करने को मंजूरी दे दी है। ईओआई दिशानिर्देशों में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले सभी स्वयं सहायता समूह (SHGs) तथा स्थानीय महिलाओं की भागीदारी के साथ बड़ी रसोई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने और संचालित करने के लिए संसाधन रखने वाले सभी संगठन इस आमंत्रण में भाग ले सकते हैं। मौजूदा प्रणाली 15 साल पुरानी है और मुख्य रूप से गैर-लाभकारी संगठनों(NPOs) द्वारा संचालित है और ज्यादातर मामलों में, उनके द्वारा नियुक्त महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के रूप में विकसित होने के बजाय केवल अकेली कार्यबल बनी हुई हैं।महिला एवं बाल विकास मंत्री श्री कैलाश गहलोत ने हाल ही में दिल्ली में कई आंगनवाड़ी केंद्रों और रसोई का दौरा किया था। इसके बाद कई बैठकों के बाद, उन्होंने विभाग को स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों या महिला समूहों की प्रभावी और कुशल भागीदारी सुनिश्चित करने के दिशानिर्देश विकसित करने का निर्देश दिया था। इस निर्देश के बाद तैयार किया गया दिशा-निर्देश पूरक पोषण की आपूर्ति के लिए देश में संचालित विभिन्न मॉडलों के अध्ययन और विभाग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति से प्राप्त सिफारिशों पर आधारित हैं। नए दिशानिर्देश पूरक पोषण की आपूर्ति में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सेवाओं की गुणवत्ता, मानकीकृत तंत्र(standardised mechanism), फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया, खाद्य लेबलिंग, पैकेजिंग और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।दिल्ली में 95 परियोजनाओं के तहत 10897 आंगनवाड़ी केंद्र हैं जिनमें लगभग 9.5 लाख महिलाएं और बच्चे पंजीकृत लाभार्थी पूरक पोषण के हकदार हैं। कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों को एकीकृत और व्यापक सेवा वितरण के लिए सहेली समन्वय केंद्र नामक हब में मिला दिया गया है जो आंगनवाड़ी सेवाओं के मुख्य उद्देश्यों की पूर्ति के अलावा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।
संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति पूरक पोषण कार्यक्रम के प्रभावी कामकाज के लिए विभिन्न हितधारकों के बिच तालमेल सुनिश्चित करेगी। विभाग स्तर पर एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी जो भागीदारी की निगरानी करेगी और उनसे जुड़े संगठनों और स्वयं सहायता समूहों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगी। विभाग द्वारा गठित मुख्यमंत्री आंगनबाडी मॉनिटरिंग कमिटी समय-समय पर योजना अंतर्गत लाभार्थियों के नामांकन हेतु मोबिलाइजेशन एवं पोषाहार वितरण की जांच करेगी।
इस योजना में आंगनबाडी केंद्रों में पंजीकृत 06 माह से 6 वर्ष की आयु के बच्चों और गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा, पूरक पोषण के अलावा आंगनबाडी केंद्रों पर दी जाने वाली सेवाओं में टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, रेफरल सेवाएं, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा शामिल हैं। पूरक पोषाहार कार्यक्रम के तहत पूर्व निर्धारित पोषण पैमाने पर गर्म पका हुआ भोजन और घर ले जाने के लिए राशन दिया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना है।महिला एवं बाल विकास मंत्री श्री कैलाश गहलोत ने एक बयान में कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों पर गर्म भोजन पकाने और संसाधित टेक-होम राशन, गुणवत्ता परीक्षण और निर्धारित वितरण के लिए एक आधुनिक व्यवस्था का निर्माण करना है ताकि इसका लाभ सभी लाभार्थियों को साल में कम से कम 300 दिन निर्बाध रूप से मिल सके।"
