मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा लंबित पड़े 16600 फ्लैट के प्रोजेक्ट का नया टैंडर करने की घोषणा करना गरीबों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है। - चौ0 अनिल कुमार








• मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा लंबित पड़े 16600 फ्लैट के प्रोजेक्ट का नया टैंडर करने की घोषणा करना गरीबों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है। - चौअनिल कुमार


•  केजरीवाल सरकार की गैर जिम्मेदाराना प्रवृति के कारण हुए विलंब से 16600 फ्लैट के प्रोजेक्ट पर 646 करोड़ की अतिरिक्त खर्चइस लापरवाही का ज़िम्मेदार अरविंद केजरीवाल - चौअनिल कुमार


नई दिल्ली, 19 जुलाई, 2022 - दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चौअनिल कुमार ने कहा कि दिल्ली के साथ अरविन्द केजरीवाल की वादा खिलाफी को उजागर करने के लिए कांग्रेस पार्टी हमेशा अग्रसर रही है। केजरीवाल की टीकरी और पूठ खुर्द में गरीबों के लिए 16600 फ्लैट बनाने की घोषणा पूरी तरह दिल्लीवालों को गुमराह करने वाला हैक्योंकि यह परियोजना शीला दीक्षित की सरकार ने आरम्भ की थी और 2018 तक पूरा करना था परंतु केजरीवाल सरकार की गैर जिम्मेदाराना प्रवृति के कारण हुए विलंब से इस योजना पर 646 करोड़ की अतिरिक्त खर्च आऐगा।

 

प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष चौअनिल कुमार के अलावा कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक श्री अनिल भारद्वाजपूर्व विधायक विजय लोचवअमरीश गौतमकम्युनिकेशन विभाग के वाईस चेयरमैन परवेज आलम और वरिष्ठ प्रवक्ता जगजीवन शर्मा भी मौजूद थे।    

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल शायद अपनी उस घोषणा से अनभिज्ञ है जिसकों उन्होंने रेलवे लाईन के नजदीक बसी 48000 झुग्गियों को महीने के अंदर हटाने के सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त 2020 के आदेश के बाद उतर रेलवे को 10 सितम्बर 2020 को पत्र लिखकर दिल्ली सरकार द्वारा 45857 फ्लैट रेलवे को देने की घोषणा की थी। पत्र में दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कहा था कि दिल्ली सरकार रेलवे 29,257 फ्लैट देगी जो सुल्तानपुरीसावदाघेवराभलस्वाबवाना और नरेला में बनकर तैयार है और शेष 16600 फ्लैट टीकरी और पूठ खुर्द में दिसम्बर 2021 तक तैयार हो जाऐंगे। उन्होंने कहा कि 16,600 फ्लैटों को पुनः बनाने की केजरीवाल सरकार की घोषणा दिल्लीवालों के साथ अन्याय है जो उनकी गरीब विरोधी सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि जेएनएनयूआरएम योजना को मार्च 2012 में स्वीकृती मिली थी जिसे मार्च 2017 तक पूरा होना था। केजरीवाल सरकार वर्ष तक इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया और अब इसपर लगभग 50 प्रतिशत अधिक 646 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे और 1564 करोड़ के इस प्रोजेक्ट परअब 2210 करोड़ होंगे।


चौअनिल कुमार ने कहा कि केजरीवाल केवल राजनीतिक उदेश्यों की पूर्ति के लिए दिल्लीवालों को गुमराह करने के लिए नई-नई घोषणाऐं करते हैउन्हें दिल्लीवासियों के हितों और अधिकारों से कोई लेना देना नही है। यही कारण है कि कांग्रेस की दिल्ली सरकार द्वारा राजीव रत्न आवास योजना के तहत बनाऐं गए मकानों को केजरीवाल और मोदी सरकार मिलकर किराऐ पर देने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों के लिए बने फ्लैटों का दिल्ली की केजरीवाल सरकार पिछले वर्षों से अलॉटमेंट करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। कांग्रेस सरकार के दौरान जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन जेएनएनयूआरएम के तहत डीएसआईडीसी ने 34620 फ्लैट बनाने का काम शुरु कियापरंतु केजरीवाल के वर्षों के शासन के बाद भी प्रोजेक्ट आधा अधूरा पड़ा है।


चौअनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार से सवाल पूछे कि 16600 फ्लैटों का जो काम चल रहा था उसके पिछले टेंडर का क्या हुआअगर कम्पनी ने समय पर काम नही किया तो उस पर कार्यवाही क्यों नही हुईजब सरकार ने प्रोजेक्ट बंद कर दिया था तो उत्तर रेलवे को दिसम्बर 2021 तक फ्लैट देने का वायदा क्यों कियाउन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल तथा मोदी सरकार ने योजना का फंड रोक कर प्रोजेक्ट को अटकाने का काम किया। क्या भ्रष्टाचार करने के लिए एक ही प्रोजेक्ट पर दोबारा टेंडर किया जा रहा है?

 

चौअनिल कुमार ने 2018 तक की सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा लागू राजीव रत्न आवास योजना के तहत जून 2018 तक प्रोजेक्ट का 90 प्रतिशत काम पूरा होने के साथ 28,344 फ्लैट बन चुके थेतब केजरीवाल सरकार ने 1,101.36 करोड़ की लागत से बनकर तैयार खाली पड़े फ्लैटों को गरीबों को अलॉट क्यों नही कियासीएजी रिपोर्ट में यह भी आपत्ति दर्ज कराई है कि योजना के 10 वर्षों तक भी सरकार ने एक भी अलॉटमेंट नही कीजबकि आज यह भवन जर्जर हालत में पड़े हैजिसके लिए केजरीवाल सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि राजीव रत्न आवास योजना के तहत 2.75 लाख गरीबां ने आवेदन किया था। केजरीवाल ने योजना का नाम बदलकर मुख्यमंत्री आवास योजना रख दिया परंतु गरीबां को आवास देने में पूरी तरह विफल रहेजबकि केजरीवाल और मोदी सरकार ने दिल्ली के गरीबों से ‘‘जहां झुग्गी वहीं मकान देने का वादा किया थाजो जुमला साबित हुआ।

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