केवाईएस ने श्रीलंका में गैले फेस प्रदर्शन के 100 दिन पूरे होने पर एकजुटता सभा का जंतर मंतर, नई दिल्ली, भारत का आयोजन किया



• केवाईएस ने श्रीलंका में गैले फेस प्रदर्शन के 100 दिन पूरे होने पर एकजुटता सभा का जंतर मंतर, नई दिल्ली, भारत का आयोजन किया!

• केवाईएस श्रीलंका के लोगों के संघर्ष में साथ खड़ा है!

• गोटाबाया राजपक्षा को तुरंत निर्वासित कर उनके देश के लोगों के पास वापस भेजने की करता है मांग!

• कार्यकारी राष्ट्रपति के इस्तीफे की भी करता है मांग! जनता की शक्ति को जन-संसदों द्वारा संस्थागत रूप देने की करता है मांग

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नई दिल्ली : क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के कार्यकर्ताओं ने आज श्रीलंका में चल रहे जन-आंदोलन के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर जंतर मंतर, नई दिल्ली, भारत पर एकजुटता सभा का आयोजन किया। ज्ञात हो कि यह आंदोलन श्रीलंका की राजधानीकोलंबो के गैले फेस मैदान में चल रहा हैजो कि राष्ट्रपति सचिवालय के ठीक सामने है। यह जनता की सामूहिक शक्ति और उनकी आकांक्षाओं का प्रतीक है। इस सभा में प्रगतिशील नागरिकों और संगठनों जैसे नॉर्थ-ईस्ट फॉरम फॉर इंटरनेशनल सोलीडेरिटी (नेफिस) ने भी भागीदारी निभाई। 

श्रीलंका में लंबे समय से आर्थिक संकट पनप रहा था। आखिर, जनता के सब्र का बांध टूट गया, और श्रीलंका की सड़कों पर व्यापक जन-सैलाब उमड़ पड़ा है, जिसने शासकीय व्यवस्था की वैधता पर ही सवालिया चिन्ह लगा दिया है। बीते दशक से ज्यादा समय से पनप रहे व्यापक आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका में इस अभूतपूर्व उथल-पुथल की स्थिति बनी है। अर्थव्यवस्था को चलाए रखने के लिए देश को खाद्यान्नरसोई गैसअन्य खाद्य पदार्थोंपेट्रोलियम आदि प्रमुख वस्तुओं के आयात करने की जरूरत है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है।

जनता ने अपनी सामूहिक शक्ति का ज़बरदस्त परिचय दिया हैजिसने राजशाही पर काबिज प्रभुत्वशाली आर्थिक वर्गों की पकड़ को कमजोर कर दिया हैऔर इससे तमाम जन-विरोधी ताकतों को जोर का झटका लगा है। मौजूदा सरकार के गिरने के बाद लोगों को पीछे नहीं हटना चाहिए, बल्कि प्रभावी ढंग से खुद को सशक्त बनाने के तरीकों को विकसित करना चाहिए। यह जरूरी है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल सरकार बदलना नहींबल्कि इस व्यवस्था में मूलभूत परिवर्तन लाना हो। इस संबंध में, ज्ञात हो कि लोगों ने न केवल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की हैबल्कि मौजूदा विपक्षी दलों के सदस्यों सहित सभी संसद सदस्यों के इस्तीफे की भी मांग की हैजो हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह सरकार बनाने के लिए सर्वदलीय गठबंधन बनाएं या व्यवस्था को बचाने के लिए नए राष्ट्रपति का चुनाव करें। ज़रूरत है कि जनता की सामूहिक शक्ति का संस्थगतिकरण किया जाए।

अर्थव्यवस्था केवल कुछ घरेलू और विदेशी पूंजीपतियों के लिए नहीं चलाई जानी चाहिए। श्रीलंका में विशाल चाय बागान और चाय कंपनियां हैं, जिनमें मेहनतकश आबादी का एक बड़ा हिस्सा काम करता है। बड़े औद्योगिक उद्यमों के साथ इनका राष्ट्रीयकरण किया जाना चाहिएऔर इस क्षेत्र में मौजूद विशाल धन और मुनाफे का उपयोग आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए किया जाना चाहिए। इसके अलावासभी आवश्यक वस्तुओं को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की सहायता से वितरित किया जाना चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का प्रबंधन जन-समितियों द्वारा किया जाना चाहिएऔर इनमें निजीकरण को खत्म करके, पूरी तरह से सार्वजनिक रूप से वित्त-पोषित किया जाना चाहिए। साथ हीअन्य सभी छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियों के लिए सहकारी समितियों का गठन और प्रसार किया जाना चाहिए।

श्रीलंका में वर्तमान समय बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि लोग इतिहास रचने की कगार पर खड़े हैं। अभी जब लोगों के हाथों में इतिहास की कमान है, तो हर पांच साल में केवल एक बार अपनी राय रखने के रस्म-अदायगी को समाप्त किया जाना चाहिए। जनता के इस आंदोलन को राष्ट्रपति के विशेषाधिकार और सरकार बदलने की कवायद के साथ ही पीछे नहीं हटना चाहिए, जिससे संसद के 225 सदस्यों के हाथ में सत्ता फिर से निहित हो जाए। इतिहास उन्हें वर्तमान से परे जाकर एक नई प्रणाली विकसित करने और श्रीलंका में जन-संसदों की स्थापना करके लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी को संस्थागत बनाने का आह्वान कर रहा है। शहरों, कस्बों और गांवों में जन-संसदों को देश के जरूरी मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, उनके हाथों सर्वोच्च शक्ति होनी चाहिए, और संसद देश के मामलों का प्रबंधन करने वाला केवल एक प्रतिनिधि निकाय होना चाहिए। जन-संसदों के पास संसद के अपने प्रतिनिधि को बुलाने और हटाने का अधिकार होना चाहिए। साथ ही, यदि देश के बहुसंख्यक जन-संसद कोई निर्णय लेते हैं, तो उनके पास देश का कानून बनाने या निरस्त करने का अधिकार होना चाहिए।


देश के लोगों की आर्थिक हालत को और बदहाल करने के उद्देश्य से आईएमएफ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय साम्राज्यवादी कर्जदाता एजेंसियों द्वारा दिये गये कर्ज को रद्द कर दिया जाना चाहिए। यह मालूम होना चाहिए कि आईएमफ देश के आम लोगों को आर्थिक बदहाली से बचाने के लिए नहीं सहायता दे रहा है, बल्कि उसकी पूरी मशक्कत है कि सत्तारूढ़ अभिजातों के हित में मौजूदा राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था कायम रहे।


केवाईएस श्रीलंका के लोगों के साथ उनके जन-विरोधी सरकार के खिलाफ संघर्ष में साथ खड़ा है, और यह मांग करता है कि गोटाबाया राजपक्षा को तुरंत निर्वासित कर उनके देश के लोगों के पास वापस भेज देना चाहिए। साथ ही, कार्यकारी राष्ट्रपति, रनिल विक्रमसिंघे को अपने पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। केवाईएस श्रीलंका के लोगों से अपील करता है कि वो नेताओं को ताकतवर बनाने की जगह, अपनी सामूहिक शक्ति का जन-सांसदों के माध्यम से संस्थगतिकरण करें।

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