नई आबाकरी नीति के खिलाफ याचिका पर जवाब मांगा


नई दिल्ली,  दिल्ली सरकार की नई आबाकरी नीति के खिलाफ दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर लिमिटेड (डीसीसीडब्ल्यूएसएल) के कर्मचारियों ने भी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। डीसीसीडब्ल्यूएसएल के कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर उन प्रावधानों को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत कहा गया है कि राजधानी में शराब की सरकारी स्वामित्व वाली दुकान नहीं होगी। मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने याचिका पर दिल्ली सरकार और डीसीसीडब्ल्यूएसएल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। पीठ ने अगली सुनवाई 27 अगस्त तय की है। कर्मचारियों की ओर से दाखिल याचिका में सरकार के नई आबकारी नीति के उस प्रावधान को रद्द करने की मांग की गई है जिसमें कहा गया है कि देश में विदेशी शराब (आईएमएफएल) और विदेशी शराब (एफएल) के लिए सरकारी स्वामित्व वाली शराब की कोई दुकान नहीं होगी। याचिका में कहा गया है कि यदि डीसीसीडब्ल्यूएसएल के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाता है, तो वहां काम करने वाले 350 लोगों का रोजगार छिन जाएगा। याचिका में नीति को मनमाना और अनुचित बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि सरकार की नई नीति संविधान के तहत लोगों को मिले आजीविका के अधिकार के खिलाफ है। दिल्ली सरकार ने सुनवाई के दौरान याचिका का विरोध करते हुए इसे रद्द करने की मांग की। सरकार ने कहा कि कर्मचारियों को मोहरा बनाकर याचिका दाखिल की गई है, ऐसे में इसे जुर्माना लगाकर खारिज किया जाए। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और राहुल मेहरा ने पीठ को बताया कि नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली आठ अन्य याचिकाओं के मामले में राहत नहीं मिलने के बाद कर्मचारियों के नाम पर यह छद्म याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता कर्मचारी संघ की ओर से अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि डीसीसीडब्ल्यूएसएल एक सोसाइटी है, जो दिल्ली सरकार के अधीन है और वहां 350 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्होंने पीठ को बताया कि कर्मचारियों की आय का एकमात्र स्रोत 70 से अधिक दुकानों के माध्यम से शराब बेचना है। यदि लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाता है तो उन्हें कोई वेतन नहीं मिलेगा और उनका जीवन दांव पर लग जाएगा।

Post a Comment

SEEMANCHAL EXPRESS

Previous Post Next Post