• माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार दिखावे के लिए हिन्दी का पक्ष लेते हैं किन्तु हिन्दी के महान साहित्यकार का करते हैं उपेक्षा ।
पटना : यूँ तो माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी जगह-जगह पर राष्ट्रभाषा के प्रबल समर्थक बन जाते हैं। जैसा कि समाचार पत्र दैनिक जागरण में 21 दिसम्बर को छपा था। अवसर था INDIA की बैठक में अपने सम्बोधन को हिन्दी में अनुवाद करने का चूँकि दक्षिण भारत वाले राजनेता हिन्दी का अनुवाद अंगेजी में करवाना चाहते थे। जिसपर माननीय श्री नीतिश कुमार जी हिन्दुस्तान में रहने वालों को हिंदी की जानकारी के संदर्भ में बात कर रहे थे। माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के गृह क्षेत्र जिला नालंदा में राज्य और देश के जाने-माने साहित्यकार प्रो . डॉ कृष्ण नारायाण 'प्रसाद मागध' जी उपेक्षित है। श्री मागध जी द्वारा सैकड़ों रचित पुस्तकों के बाद भी अभी तक इन्हें पद्म श्री पुरस्कार नहीं मिल सका। कई बार वस्तु स्थिति से अवगत कराने हेतु मुख्यमंत्री सचिवालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसका डायरी संख्या - 2023060 117 है किन्तु अभी तक कोई सम्पर्क नहीं किया गया है और न पत्राचार किया गया है। इस स्थिति में हिंदी के प्रति दिखावटी पक्ष लेना कहीं से उचित्र प्रतीत नहीं होता है। ऐसा मानना है सीमांचल एक्सप्रेस न्यूज ब्यूरो चीफ श्री अशोर कुमार जी का।
