• जाति आधारित जनगणना कहीं जातीय उन्माद फैलाने के लिए तो नहीं ?
पटना: बिहार में जाति आधारित जनगणना करवाई गयी उसे सार्वजनिक भी किया गया जिसमें सबसे अधिक यादव जाति की संख्या दर्शाया गया है। अब तो यह सवाल उठने लगा है कि यादव जाति की संख्या अधिक है, तो हमारे सांसद विधायक भी अधिक होगें और यह जनसंख्या तो बढ़ते ही रहेगा क्योंकि अगर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो माल्थस का सिद्धांत भी लागू हो जायेगा कि 1 के बाद 2 तथा 2 के बाद 4 तथा 4 के बाद 8 होगा। एक समय जनसंख्या नियंत्रण की बात की जा रही थी अब जनसंख्या बढ़ाने की बात सोची जायेगी। जिस जाति के लोग जनसंख्या को नियंत्रित किए हुए थे वो भी इस जातिय जनगणना के बाद अपना जाति की संख्या बेतहाशा बढ़ाने लगेंगें ताकि मेरे जति का ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधि इस लोकतंत्र में चुना जाए। क्या बिहार के लोगों का इससे बेरोजगारी दूर होगी या फिर लोगों को भूखे रहना पड़ेगा । यह भी बड़ा सवाल है। राजनीति करने वाले लोग तो जातीय समीकरण बनाएंगे चूंकि उसका तो यही रोजगार है। क्या इस जातीय गणना से बिहार की तकदीर बदलेगा ?
