संवाददाता • अशोक कुमार सीमांचल एक्सप्रेस उप ब्यूरो चीफ
पटना: बिहार सरकार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी दावा खोखला साबित हो रहा है वर्तमान समय में शिक्षा सचिव केके पाठक का विधालय निरीक्षण के क्रम में सरकार के सभी दावों के पोल खोल दी है। विधालय है तो शिक्षक नहीं, शिक्षक है तो छात्र नहीं, छात्र है तो विधालय भवन नहीं । तो आखिर कैसी शिक्षा बिहार सरकार के स्कूलों में दी जा रही है इससे भी आगे बात की जाय तो 9 वीं 10 वीं के छात्र स्कूल में नामांकित तो है लेकिन कोचिंग का सहारा लेने के लिए मजबूर हैं। 11वीं और 12वीं के छात्र भी नन एडेंटिग नामांकन कर बिहार एवं बिहार से बाहर कोटा, दिल्ली, हैदराबाद जैसे शहरों में कोचिंग क आई आई टी, जेईई मेन, मीट, की तैयारी कर रहे है। यही कारण है कि बड़े बड़े पूंजीपति ए... राजनीतिक रसूक दारों द्वारा कोचिंग चलाये जा रहे हैं और बिहार की शिक्षा व्नावस्था गुड़ गोबरकी भाँति सड़ गल रही है बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष श्री राजमणि प्रसाद स्वीकार करते हैं कि बिहार में शिक्षा का स्वर निचले पायदान पर जा चुकी है। स्कूली शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर के शिक्षा में गिरावट आई है। वे यह भी स्वीकार करते है कि दो तीन दशक पहले जो शिक्षा का हाल था बिना कोचिंग के भी छात्र आईआईटी, एनआईटी नोट, कसैट कम्पलीट करते थे किन्तु आज सभी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर गिरा है जो चिंता का विषय है। अगर बिहार के शिक्षक उसे चुनौति के रूप में लें और बिहार सरकार मनोबल सुद्द करे तो शिक्षा में सुधार अभी भी संभव है। वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा का स्तर गिरते आने के कारण ही कोचिंग संस्थानों की बाढ़ आ गई है और अभिभावक उनके शिकार हो रहे हैं और कोचिंग वाले अरबों खरबों की कमाई एक-एक सत्र में करते है। इनकम टैक्स विभाग भी इन्हें सबकुछ देखते हुए भी नहीं पकड पाती है
