• आशा कार्यकर्ता द्वारा अमानवीय व्यवहार प्रदर्शित करने पर महिला प्रसव पीड़ा से कराहती रही
• अशोक कुमार ब्यूरो रिपोर्ट • सीमांचल एक्सप्रेस
पटना/ गया: घटना परैया प्रखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है। जहां आशा हड़ताल पर हैं। वहीं हड़ताल के कारण आशा कार्यकर्ता ने स्वास्थ्य केंद्र के द्वार पर ताला जड़ दिया था। जिस काम के लिए आशा कार्यकर्ता की बहाली हुई है और जिस काम के लिए आशा जानी जाती है उस प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को अगर आशा कार्यकर्ता ही पीड़ा दे। तो यह अमानवीय घटना हम सभी मानव एवं सरकार को सोचने के लिए मजबूर करता है कि यह आर्थिक पक्ष कहाँ तक हम मानव को गिरायेगा। घटना गया के परैया स्वास्थ केन्द्र का है जहाँ आशा कार्यकता ने स्वास्थ्य केन्द्र पर ही ताला लगा रखी थी और वहाँ एक प्रसव के लिए महिला आई जिसे अस्पताल में आशा कार्यकता अपनी मांग के कारण जाने नहीं दिया । परिणाम दुःखद एवं विभत्स था जहाँ प्रसव महिला ने फर्श पर ही किया। डॉक्टर भी परेशान थे चूंकि आशा कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के दरवाजे पर ताला लगा रखी थी। ये आशा कार्यकर्ता कितने असंवेदनशील थी यह समझा जा सकता है। रुपया, पैसा आज वर्तमान समय में कितना महत्व का है जो शायद ये भोली भाली आशा न समझ सकी शायद ये भी इसी तरह माँ बनी होगी। अगर ये आशा इस दर्द को समझ जाती तो शायड़ माँ का ममत्व समझ में आता।
