नालंदा । बिहारशरीफ 85 % बहुजन एकता मंच प्रोफेसर चन्द्रशेखर सिंह यादव बिहार सरकार के समर्थन में जुलूस निकाली और परमहंस मनुवादी सोच रखने वाले का हास्पीटल चौक बिहारशरीफ में पुतला दहन किया गया। और मंच के संस्थापक डॉ० कामेश्वर पासवान, प्रदेश अध्यक्ष रजनीश नागवंशी, अनिल क्रांती, सोना सरदार, बबलु पासवान, कल्याण कुमार, अशोक मालाकार, धिरेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि रामचरित मानस, बंच ऑफ थॉटस एवं मनुस्मृति छुआछुत, भेद-भाव, ऊँच-नीच, पाखंडवाद एवं मानवता और स्त्री के विरूद्ध दोहा, चाँपाई कुछ ही नहीं है एवं अमानवीय पर आधारित पुस्तक है. जो काफी निंदनीय हैं। ऐसे पुस्तक को समुद्र में प्रवाह कर देनी चाहिए जो मानव के विरूद्ध हो बात केवल तुलसी दुबे की एक-दो चौपाई की नहीं है जो दलितों और स्त्रीयों की प्रतिष्ठा को नाकारती है जैसे
विप्र सकल गुण हिना. पुलहि शूद्र न पूजहू वेद प्रवीणा
यानी ब्राह्मण अवगुणों से भरा है, लेकिन उसकी पूजा करनी चाहिए लेकिन शूद्र वेद का ज्ञाता है प्रकांड विद्वान है तब भी पूजा नहीं करनी चाहिए, जिस रामचरित मानस में या अन्य ग्रन्थ में ऐसी बाते हो तो उसे हम कैसे स्वीकार कर सकते हैं इसलिए शिक्षा मंत्री बिहार सरकार को मंच प्रशसा करती है। ये सभी पुस्तक मानसिक रूप से बहुजनों को गुलाम बनाये हुए हैं 85 % बहुजन एकता मंच आगाह करती है कि आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, पाखंडवाद, परंपरा पर आधारित इन पुस्तकों को बाबा साहब अंबेड्कर 1927 ई0 में ही विरोध करते हुए जला दिये थे। नारी को घर से निकलने नहीं देना, शिक्षा से वंचित रखना, 6743 जातियों को शूद्र बनाकर रखना, संपति नहीं रखना, स्त्री को सती करना, विधवा विवाह नहीं करना।
"ढोल गँबार शूद्र पशु नारी सकल ताड़न के अधिकारी"
जिस ग्रन्थ में ऐसी बातें वर्णित हो वह मानने योग्य कभी हो ही नहीं सकता, इसलिए नहीं मानना चाहिए। यदि भारत में कोई पवित्र ग्रन्थ है तो वह 'भारत का संविधान है। इसी संविधान में बाबा साहेब अंबेदकर हिन्दू कोड बिल लाकर महिलाओं को एवं अन्य को हक और अधिकार दिये है इसलिए हर घर में भारत का संविधान' होना चाहिए। भारत एक बेहद और विशाल देश है और इस देश के एक बड़ा तपका को सदियों से मुर्ख बनाया जा रहा है, जब मानव जन्म लेता है तो जन्म के तुरंत बाद ही वर्ण और जाति में हो जाता है दुर्भाग्य है इस भारत देश में इसलिए डॉ० अंबेडकर का सिलेबस / व्यवस्था ही व्यक्ति को बुद्धिमान, तार्किक और सभ्य बनाता है, न कि पाखंडवाद और अंधविश्वास बाबा साहेब के सपनों का भारत बौद्धमय' बनाने के लिए प्रेम, करुणा, मैत्री की भावना बनाने की दिशा में आगे भारत बढ़ रहा है, बाबा साहेब के सपनों को मंजिल तक पहुँचाने के लिए 85 % बहुजन एकता मंच कृत संकल्प है। तथागत बुद्ध की ज्ञान स्थली विश्व धरोहर मगध है यहाँ से विश्व को ज्ञान की रोशनी मिली थी।
अपने पूर्वजों की खोई विरासत बौद्धमय बनाने की दिशा में बिहार फिर से इतिहास दोहराने की अंगड़ाई ले चुका है, अंजाम चाहे जो भी हो याचना नहीं, अब रण होगा हर कीमत पर अब भारत बौद्धमय होगा। यह बात किसी के कान में नहीं बल्कि नालन्दा जिले के जंगे मैदान से होगी बहुजनों के साथ सदियों से जघन्य अत्याचार, अपराध, शोषण, दुत्कार, दमन हो रहा है भारतीय सामाजिक व्यवस्था के शिकार सभी जनों को संवैधानिक हक वो अधिकार दिलाने वाले बाबा साहब अंबेडकर का ही देन हैं, क्योंकि बाबा साहेब ने बहुजनों को संवैधानिक हक और अधिकार कीचड़ में फूल खिलाने का गुरूत्तर कार्य किये। कीचड़ जिससे सामाजिक दुर्गंध आती थी, उसी कीचड़ में फूल लगाकर शुगंध बिखेरने का कार्य बाबा साहेब ने किये हैं, उस कीचड़ के फूलों में से हम सभी बहुजन है। डॉ० अंबेडकर ने बहुत सोच विचार कर तत्कालीन वर्ण व्यवस्था व जाति व्यवस्था के शिकार समाज बहिष्कृत, अछूत, जातियों को सूची वद्ध करके अनेक जातियों को एकीकृत कर संवैधानिक अधिकार बहुजनों को दिये हैं। इस अवसर पर नरेश पासवान, शक्ति कुमार विश्वनाथ प्रसाद, सुभाष कुमार, अशोक कुमार मालाकार, धिरेन्द्र यादव इत्यादि
