•दिल्ली सरकार की अपनी कमेटी की रिपोर्ट ने खोली पोल
•जहरीले पानी से लोग हो रहे हैं गंभीर बीमारियों के शिकार
•भाजपा विधायकों को नहीं दी विधानसभा में चर्चा की अनुमति
•भाजपा विधायकों ने दिया मुख्यमंत्री कार्यालय पर धरना
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि यमुना का पानी आठ साल में 200 प्रतिशत ज्यादा प्रदूषित हो गया है। यही प्रदूषित पानी जनता को सप्लाई किया जा रहा है जिससे लोग कैंसर, किडनी, लीवर, फेफड़े और पेट की गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने यमुना की सफाई के लिए दिल्ली सरकार को 2500 करोड़ रुपए दिए जिसका दिल्ली सरकार कोई हिसाब नहीं दे रही। यह मामला भाजपा विधायकों ने आज विधानसभा में उठाने का प्रयास किया और भाजपा विधायक अपने साथ यमुना की गंदे पानी को बोतलों में भरकर लाए लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें यह मामला उठाने की इजाजत नहीं दी। भाजपा विधायकों द्वारा विरोध करने पर लगातार तीसरे दिन उन्हें बाहर निकाल दिया गया। भाजपा विधायकों ने बाद में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय तक मार्च किया और फिर धरना दिया।
नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी और भाजपा विधायक अजय महावर ने नियम-54 के अंतर्गत यमुना में प्रदूषण का मामला विधानसभा में उठाने का प्रयास किया। बिधूड़ी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार न तो दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या के प्रति गंभीर है और न ही यमुना के प्रदूषण के प्रति उसने कोई चिंता जताई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनावों में वादा करते हैं कि वह दिल्ली की जनता के साथ यमुना में डुबकी लगाएंगे लेकिन यमुना की हालत तो यह हो गई है कि बदबू के कारण उस पानी के निकट जाने की ही हिम्मत कोई नहीं जुटा सकता। एनजीटी के आदेश पर बनाई गई कमेटी की पहली मीटिंग में जो रिपोर्ट जारी की गई है, उसने केजरीवाल सरकार की सारी पोल खोलकर रख दी है। पिछले आठ साल में यमुना में सफाई होना तो दूर वह 200 फीसदी ज्यादा प्रदूषित हो गई है। हैरानी की बात यह है कि यह रिपोर्ट स्वयं दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने जारी की है जो दिल्ली सरकार का ही विभाग है। इसके लिए तो केजरीवाल उपराज्यपाल पर भी दोष नहीं मढ़ सकते। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में यमुना जितनी प्रदूषित थी, अब उससे दुगुनी हो गई है। यमुना की सफाई के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को 2500 करोड़ रुपए दिए हैं लेकिन दिल्ली सरकार उसका हिसाब नहीं दे रही। जाहिर है कि वह पैसा भ्रष्टाचार की नजर चढ़ गया है। दिल्ली जल बोर्ड में घोटालों के कारण 2016 से न बैलेंस शीट बनी है और न ही ऑडिट कराया गया है।
बिधूड़ी ने कहा कि जहरीले पानी की सप्लाई के कारण दिल्ली में फसल भी पूरी तरह जहरीली हो चुकी है। वहां पैदा हुए अनाज और सब्जियां खाकर दिल्ली के लोग फेफड़ों, किडनी और लीवर की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। लोग के पेट लगातार खराब हैं। दिल्ली की आधी जनता दूषित पानी पीने के लिए मजबूर है। जो यमुना दिल्ली की लाइफ लाइन बन सकती थी, केजरीवाल सरकार की लापरवाही के कारण जानलेवा बन रही है।
भाजपा विधायकों ने जब गंभीर मामला विधानसभा में उठाने की कोशिश की तो केजरीवाल सरकार ने इसका विरोध किया क्योंकि वे मैली यमुना के कलंक पर बात नहीं करना चाहते। इसीलिए भाजपा के सभी विधायक सर्वश्री मोहन सिंह बिष्ट, विजेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश शर्मा, जितेंद्र महाजन, अनिल वाजपेयी, अभय वर्मा और अजय महावर ने विरोध प्रकट किया। वे मार्च करते हुए हुए विधानसभा में मुख्यमंत्री केजरीवाल के कार्यालय के बाहर पहुंचे और वहां धरना दिया।
