भारतीय लोकतंत्र में राजतंत्र हावी आलेख - प्रसिद्ध समाजशास्त्री अशोक कुमार




पटना, रिपोर्टर - प्रदीप कुमार : हमारे देश भारत में संविधान सम्मत लोकतंत्र, प्रजातंत्र को अंगीकार किया गया था। संविधान आज भी लोकतंत्र प्रजातंत्र की ही बात बताता है किन्तु हमारे देश के राजनेताओं ने निहित स्वार्थ के लिए प्रजातंत्र की जगह राजतंत्र को ही प्रश्नय दिया है आज जो देश की हालात है वो किसी भी भारतीय नागरिक से छुपा नहीं है। भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा दल सबसे पुराना दल कांग्रेस हो या जनता दल यू हो या राजद हो या वामपंथी विचारधारा वाली पार्टी हो। सबों में एक ही बात प्रचलित है। यही कारण है कि सिद्धान्तवादी विचारधारा के लोग राजनीत से दूर होते जा रहे हैं। चूंकि प्रमुख राजनीति दल उन लोगों को भाव नहीं देता है क्योंकि नहीं राजतंत्र हावी है। पार्टी प्रमुख के बेटे, बेटियाँ, पत्नी या परिवार के लोग ही प्रमुख पदों पर आसीन होगें। जो राजनीति का ककहरा भी नहीं जानते । पुराने कार्य कर्त्ता, सदस्य बुढ़े होकर मृत्यु को भी प्राप्त हो जायेंगे, लेकिन उन्हें प्रमुख पदों पर नहीं बैठाया जा सकता। और पार्टी प्रमुख के चहेते न कोई योग्यता के बावजूद

भी बड़े पद का पर ही आसीन होगें । यही आज के परिप्रेक्ष्य में देखा' जा रहा है। पार्टी से इत्तर अगर कोई शब्द कहना भी चाहे तो तुरंत उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। वर्तमान राजनीति में य यह सब बातें फल-फूल रहा है जो निंदनीय' ही नहीं बल्कि भारतीय संविधान के लिए घातक सिद्ध होने वाला है।

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