• बिहार राज्य में अराजकता का माहौल
• आलेख प्रमुख शिक्षाविद श्री अशोक कुमार
पटना ( रिपोर्ट - प्रदीप कुमार ) : बिहार प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जो स्थिति है वह अराजकता का माहौल जैसा दिख रहा है। बिहार में शिक्षित बेरोजगारी, बाढ़, सुखाड़, डकैती, हत्या छिनतई, बैंक लुट, अपहरण, सड़क जाम, में तहरील, बिमारी इन सारी समस्याओं से जनता सड़क गड्डों जुझ रही है किन्तु मंत्री, विधायक, मुख्यमंत्री को उन सब समस्याओं के निदान का रास्ता' ही दिखाई नहीं दे रहा है। इन्हें तो केवल कुर्सी प्यारी है। इनकी कुर्सी कैसे बची रहे इनपर ही इनका ध्यान केन्द्रित है।
वर्तमान समय में अस्पतालों की स्थिति अत्यन्त दयनीय है। प्रदेश में डेंगू महामारी का रूप ले लिया है किन्तु स्वास्थ्य मंत्री को उसका ध्यान ही नहीं है इन्हें तो कुर्सी बचाने के यत्न एवं प्रयत्न समय जाया हो जाता है। आम जनता' बेहाल हो उससे इन्हें क्या लेना देना । हाल के दिनों में उन्हें अस्पताल के औचक नही निरीक्षण किया गया जिससे सरकारी अस्पताला की पोल खुल गई। उसके बाद माननीय मंत्री महोदय कान में तेल डालकर सो गये। आज हालात यह है कि बिहार में थे भी व्यक्ति गर्व से यह नहीं कह सकता कि हम सुरक्षित हम स्वस्थ हैं हमें रोजगार मिल ही जायेगा। बिहार में सत्ता बदला परन्तु समस्याओं का निदान नहीं हो सका। शैक्षणिक अराजकता भी कायम है जिसे नकारा नहीं जा सकता। सत्ता में आने के पहले वादे बहुत किए जाते हैं किन्तु सत्ता मिलते ही सब भूल जाते। शिक्षाविद् अशोक कुमार की कलम से