आज़ादी के 75वें वर्ष में देशभक्त शहीदों की स्मृति में स्वतंत्रता स्मारक बनना चाहिए: सतगुरु ठाकुर दलीप सिंघ जी (वर्तमान नामधारी गुरु)।




आज़ादी के 75वें वर्ष में देशभक्त शहीदों की स्मृति में स्वतंत्रता स्मारक बनना चाहिए: सतगुरु ठाकुर दलीप सिंघ जी (वर्तमान नामधारी गुरु)

हमारे देश में पराधीनता के चिन्ह (इंडिया गेट, गेटवे ऑफ़ इंडिया आदि) तो हैं, परन्तु भारत की स्वतंत्रता का कोई भी विशेष चिन्ह-स्मारक नहीं है। आज भारत को स्वतंत्र हुए 75 वर्ष हो गए हैं और हम भारतवासी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। इस शुभ अवसर पर “अद्वितीय भारतीय स्वतंत्रता स्मारक” बनना चाहिए। जिस स्मारक को, हम गर्व से लोगों को दिखा सकें। 

अमेरिका जैसे विकसित देश में “स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी” बना है, कंबोडिया जैसे छोटे व ग़रीब देश में भी “फ्रीडम मोन्यूमेंट” बना है। यह दोनों स्मारक स्वतंत्रता के चिन्ह हैं। परंतु, हमारे भारत में स्वतंत्रता का प्रतीक कोई स्मारक नहीं हैं। इसलिए, सतगुरु ठाकुर दलीप सिंघ जी के आदेश अनुसार, नामधारी सिखों की विनती है कि “हम सभी भारतीय मिलकर, एक अद्वितीय भारतीय स्वतंत्रता स्मारक बनाएँ”। जिसे हम स्वतंत्रता चिन्ह के रूप में; गर्व से लोगों को दिखा सकें। सर्वप्रथम “भारतीय स्वतंत्रता स्मारक” दिल्ली में बने। उसके उपरांत, उसी प्रकार से; लघु आकार के "भारत स्वतंत्रता स्मारक" सभी प्रांतों की राजधानियों में तथा बड़े शहरों में बनने चाहिए। 

 “अद्वितीय भारतीय स्वतंत्रता स्मारक” ऐसा होना चाहिए, सम्राट अशोक के स्तंभ (सम्राट अशोक का स्तंभ भारत का विशेष चिन्ह है) जैसी ऊँची मीनार बनाई जाए जो दूर से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करे और उसके साथ ही भारत के नक्शे जैसा एक और स्मारक बने जिसके एक तरफ स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र व नाम जगमगाते हों और दूसरी तरफ देश भक्तों की फिल्में बड़ी एल.ई.डी. स्क्रीन पर चलें। 1947ई. से पूर्व जो लोग देश की स्वतंत्रता के लिए, देश प्रेम की भावना से (वेतन लेने के लिए नहीं) शहीद हो गए: जैसे:- भगत सिंघ, करतार सिंघ सराभा, अमरचंद जैन बांठिया, लाला लाजपत राय, अशफाक उल्ला खां आदि के नाम "भारत स्वतंत्रता स्मारक" पर जगमगाने चाहिए। यह स्मारक ऐसा अद्वितीय होना चाहिए जिसको देश और विदेश के पर्यटक देखने आएँ।

भारतीय स्वतंत्रता स्मारक बनाने के लिए सभी भारतवासियों को सेवा के रूप में श्रमदान तथा रुपए दान (भले ही कोई 2 पैसे या 2 रुपए का दान दे) करने चाहिए, ताकि सभी के मन में एकता व देश प्रेम की भावना जागृत हो सके।

वॉर मेमोरियल (समर स्मारक) भारत का स्वतंत्रता स्मारक नहीं है। क्योंकि, वॉर मेमोरियल तो 1947ई. के उपरांत भारतीय सेना के शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बना है।

विशेष नोट: यह सुझाव महान स्वतंत्रता सेनानी, सतगुरु राम सिंघ जी नामधारी (कूका) के वंशज तथा नामधारियों के वर्तमान गुरु, सतगुरु ठाकुर दलीप सिंघ का स्वतंत्र सुझाव है। ठाकुर दलीप सिंघ जी ने इस प्रकार के बिल्कुल नए: देश प्रेम तथा आत्म सम्मान के बहुत सारे प्रस्ताव व सुझाव लोगों के सामने रखे हैं। हम नामधारी आरंभ से ही राष्ट्रवादी हैं। नामधारी सिख वो हैं जिन्होंने 1857ई. में अंग्रेज़ों के विरुद्ध आंदोलन शुरू किया तथा सर्वप्रथम: स्वदेशी वस्तुएं अपनाकर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया था। नामधारियों ने ही सर्वप्रथम शस्त्रबद्ध आंदोलन का आरम्भ किया था। नामधारी लहर, इतिहास में “कूका मूवमेंट” के नाम से भी जानी जाती है। हजारों नामधारी; देश की स्वतंत्रता के लिए शहीद हुए। उनमें से केवल 100 नामधारियों के नाम ही इतिहास में अंकित है। बाकी हज़ारों नामधारी शहीदों के बारे में इतिहास में कुछ भी अंकित नहीं है।

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